दिल्ली के बीचों-बीच स्थित जंतर मंतर चर्चा में है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में यहां छात्र पहुंच रहे हैं और यहीं कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन चल रहा है. पर क्या आप जानते हैं कि जंतर मंतर सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक विरासत का एक अनमोल उदाहरण है. 18वीं शताब्दी में निर्मित यह वेधशाला उस समय की उन्नत खगोलीय समझ और गणितीय ज्ञान का प्रमाण मानी जाती है. आज भी देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं. जानें दिल्ली के जंतर मंतर से जुड़ी 10 रोचक बातें.
दिल्ली के जंतर मंतर के बारे में ये 10 बातें नहीं जानते होंगे आप
1. जंतर मंतर कोई मंदिर नहीं है
नाम सुनकर कई लोग इसे धार्मिक स्थल समझ सकते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक खगोलीय वेधशाला (Astronomical Observatory) है. इसका निर्माण ग्रहों, नक्षत्रों और सूर्य-चंद्रमा की गति का अध्ययन करने के लिए किया गया था.
2. इसका निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने कराया था
दिल्ली का जंतर मंतर 18वीं शताब्दी में आमेर के शासक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था. वे खगोल विज्ञान और गणित में गहरी रुचि रखते थे तथा उन्होंने खगोलीय गणनाओं को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से इन वेधशालाओं का निर्माण कराया.
3. यह भारत के पहले जंतर मंतरों में से एक है
दिल्ली का जंतर मंतर सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित पांच जंतर मंतर वेधशालाओं में सबसे पहला माना जाता है. इसके बाद जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में भी जंतर मंतर बनाए गए.
4. यहां 13 प्रमुख खगोलीय यंत्र मौजूद हैं
दिल्ली के जंतर मंतर परिसर में 13 वैज्ञानिक यंत्र हैं. इनका उपयोग समय मापने, ग्रहों की स्थिति जानने और विभिन्न खगोलीय गणनाओं के लिए किया जाता था.
5. सम्राट यंत्र सबसे प्रसिद्ध उपकरण है
यह जंतर मंतर का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध यंत्र है. इसे विशाल सूर्य घड़ी (Sundial) के रूप में बनाया गया था, जिसकी सहायता से सूर्य की छाया के आधार पर समय का पता लगाया जाता था.
6. मिश्र यंत्र की अपनी खासियत है
जंतर मंतर का मिश्र यंत्र कई यंत्रों का संयोजन है. इसका उपयोग वर्ष के सबसे लंबे और सबसे छोटे दिन की पहचान सहित विभिन्न खगोलीय गणनाओं के लिए किया जाता था.
7. जयप्रकाश यंत्र से आकाशीय पिंडों का अध्ययन होता था
जयप्रकाश यंत्र आधे गोलाकार आकार का है. इसकी मदद से सूर्य, चंद्रमा और अन्य आकाशीय पिंडों की स्थिति का अध्ययन किया जाता था.
8. विशाल आकार के पीछे था वैज्ञानिक कारण
जंतर मंतर के अधिकांश यंत्र ईंट, पत्थर और चूने से बनाए गए हैं. इन्हें बड़े आकार में इसलिए बनाया गया ताकि उस समय उपलब्ध छोटे धातु के उपकरणों की तुलना में अधिक सटीक माप प्राप्त की जा सके.
9. संसद मार्ग पर स्थित है यह ऐतिहासिक धरोहर
दिल्ली का जंतर मंतर संसद मार्ग (Parliament Street) पर कनॉट प्लेस के पास है. यह राजधानी के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है.
10. आज भी विज्ञान और इतिहास का अनोखा संगम है जंतर मंतर
करीब 300 वर्ष पुरानी यह वेधशाला आज भी भारत की वैज्ञानिक सोच, वास्तुकला और खगोलीय ज्ञान का जीवंत उदाहरण है. आधुनिक तकनीक के दौर में भी जंतर-मंतर यह दिखाता है कि सदियों पहले भारत में खगोल विज्ञान कितना उन्नत था.
NEET पेपर लीक से पहले किन बड़े मामलों के लिए बनाए गए फास्ट ट्रैक कोर्ट? देख लीजिए लिस्ट
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं