CBSE Three-Language Policy FAQ: थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सीबीएसई की तरफ से बड़ा फैसला लिया गया है, तमाम छात्रों की मांग और विरोध के बाद बोर्ड ने यू-टर्न लेते हुए साफ किया है कि इस साल 10वीं में पढ़ रहे छात्रों पर ये पॉलिसी लागू नहीं होगी, यानी उन्हें तीसरी भाषा चुनने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. इसके अलावा पिछली क्लासेस में पढ़ रहे बच्चों को भी राहत दी गई है. कुल मिलाकर जिन चीजों को लेकर विवाद हो रहा था, उन्हें अब ठीक कर लिया गया है. इसी बीच लाखों छात्रों के मन में अब नए नियमों को लेकर कई तरह के सवाल घूम रहे हैं, जिनके जवाब हम आपके लिए लेकर आए हैं. यहां आपको थ्री लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े हर सवाल का जवाब आसान भाषा में मिलेगा.
1. CBSE की Three-Language Policy क्या है?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत अब छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी. इसमें एक जरूरी शर्त ये है कि तीन में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए.
2. ये नई नीति कब से लागू हो रही है?
ये नई नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से CBSE से मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों में प्रभावी रूप से लागू की जा रही है.
3. भारतीय भाषाएं और गैर-भारतीय भाषाएं कौन सी हैं?
हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती, ओडिया, असमिया आदि भाषाएं हिंदी भाषाएं हैं. वहीं गैर-भारतीय/विदेशी भाषाएं अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी, स्पेनिश आदि हैं.
4. जो छात्र अभी कक्षा 10वीं में हैं, उन पर क्या असर होगा?
ऐसे छात्रों पर फिलहाल इस साल कोई असर नहीं होगा. 10वीं कक्षा के छात्रों को पुरानी व्यवस्था यानी टू लैंग्वेज पॉलिसी के तहत ही पढ़ना है. उन्हें तीसरी भाषा लेने की जरूरत नहीं है.
5. इस साल कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए क्या नियम हैं?
9वीं के हर छात्र को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए. इसे समझने के लिए 3 अलग-अलग सिचुएशन दी गई हैं:
सिचुएशन 1: अगर आप पहले से दो भारतीय भाषाएं (जैसे- हिंदी + तमिल) पढ़ रहे हैं, तो तीसरी भाषा कोई भी अन्य भारतीय भाषा या विदेशी भाषा (जैसे अंग्रेजी या फ्रेंच) चुन सकते हैं.
सिचुएशन 2: अगर आप एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे- तमिल + अंग्रेजी) पढ़ रहे हैं, तो तीसरी भाषा के रूप में आपको कोई भारतीय भाषा ही चुननी होगी.
सिचुएशन 3: इसमें इस साल के लिए विशेष छूट दी गई है. अगर आप पहले से दो विदेशी भाषाएं (जैसे- अंग्रेजी + फ्रेंच) पढ़ रहे हैं, तो आप इन्हें जारी रख सकते हैं, लेकिन तीसरी भाषा के रूप में आपको एक भारतीय भाषा जोड़नी होगी. ये छूट सिर्फ वन टाइम है.
6. क्या कक्षा 9वीं के छात्रों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी होगी?
नहीं, इस बैच के छात्रों के लिए तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा. जब यह बैच 2027-28 में 10वीं में जाएगा, तब उन्हें तीसरी भाषा की कोई CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी.
7. कक्षा 7वीं और 8वीं के छात्रों के लिए क्या नियम हैं?
जब ये छात्र 9वीं और 10वीं में पहुंचेंगे, तो इन्हें भी तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिसमें दो भारतीय भाषाएं होंगी. छूट की बात करें तो जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, उन्हें बस एक अतिरिक्त भारतीय भाषा जोड़नी होगी. इनके लिए भी तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी.
8. कक्षा छठी और इसके बाद आने वाले बैच के लिए क्या नियम हैं?
इस बैच से सीबीएसई का थ्री लैंग्वैज पॉलिसी का नियम पूरी तरह से लागू होगा. इन्हें तीन में से दो भारतीय भाषाएं पढ़नी ही होंगी. सबसे जरूरी बात ये है कि जब कक्षा 6वीं का यह बैच आगे चलकर 10वीं में पहुंचेगा, तो इन्हें तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा देनी होगी.
9. कहां मिलेगी तीसरी भाषा की किताबें?
NCERT थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के लिए 22 भारतीय भाषाओं में कक्षा 6वीं की किताबें अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करा रहा है. यहीं से किताबें डाउनलोड की जा सकती हैं.
10. किन छात्रों को मिली है थ्री लैंग्वेज पॉलिसी से छूट?
- दिव्यांग छात्रों (CwSN) को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD) 2016 के तहत इस पॉलिसी से पूरी तरह छूट मिलेगी.
- भारत के बाहर स्थित सभी CBSE स्कूलों को तीसरी भाषा के रूप में भारतीय भाषा पढ़ने से पूरी तरह छूट है.
- जो विदेशी छात्र भारत लौट रहे हैं, उन्हें भी तीसरी भाषा के रूप में भारतीय भाषा पढ़ने से छूट दी गई है.
11. पेरेंट्स का ट्रांसफर दूसरे राज्य में होने पर क्या होगा?
ऐसे मामलों में छात्र मिडिल स्टेज (कक्षा 6 से 8) में चुनी गई अपनी भाषाओं के कॉम्बिनेशन को ही कक्षा 9वीं में भी जारी रख सकता है. स्कूलों को ऐसे छात्रों के लिए जरूरी चीजें जुटानी होंगीं.
12. स्कूलों में तीसरी भाषा पढ़ाने के लिए कहां से आएंगे टीचर्स?
CBSE ने इसके लिए नियमों को थोड़ा फ्लेक्सिबल किया है. स्कूल अपने मौजूदा योग्य शिक्षकों, रिटायर्ड टीचर्स, पोस्टग्रेजुएट उम्मीदवारों को रख सकते हैं या फिर आस-पास के स्कूलों के साथ टीचर शेयरिंग और ऑनलाइन/हाइब्रिड क्लासेस की मदद ले सकते हैं.
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