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कॉपियों में गड़बड़ी से लेकर टेंडर के खेल तक, तीन GenZ युवाओं ने खोली CBSE के डिजिटल ब्लंडर की पोल

सीबीएसई के डिजिटल मार्किंग (OSM) सिस्टम पर सवाल उठाकर तीन लड़के वेदांत, सार्थक और निसर्ग देशभर में छा गए हैं. सभी ने परत दर परत सीबीएसई के डिजिटल सिस्टम की पूरी पोल खोलकर रख दी.

कॉपियों में गड़बड़ी से लेकर टेंडर के खेल तक, तीन GenZ युवाओं ने खोली CBSE के डिजिटल ब्लंडर की पोल
CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की पोल खोलने वाले तीन बच्चे

CBSE OSM Controversy: सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम यानी कंप्यूटर पर कॉपियां जांचने के डिजिटल तरीके को लेकर देशभर में भारी बवाल मचा हुआ है. छात्र और माता-पिता रिजल्ट में गड़बड़ियों, कॉपियां धुंधली दिखने और री-इवैल्युएशन पोर्टल क्रैश होने जैसी दिक्कतों से परेशान हैं. सरकार ने बोर्ड के चेयरमैन और सेक्रेटरी को हटा दिया है. लोखंडे प्रशांत सीताराम को नया मुखिया बनाया गया है. लेकिन इस पूरे घमासान के बीच तीन टीन एजर स्टूडेंट्स ऐसे हीरो बनकर सामने आए, जिन्होंने अपने दम पर न सिर्फ सीबीएसई के डिजिटल दावों की पोल खोली, बल्कि पूरे देश में टांसपरेंसी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी. आइए जानते हैं ये तीनों लड़के कौन हैं और इन्होंने क्या गड़बड़ियां पकड़ीं.

1. वेदांत श्रीवास्तव (दिल्ली)

दिल्ली के रहने वाले क्लास 12 के छात्र वेदांत श्रीवास्तव की कहानी से ही इस पूरे विवाद की शुरुआत हुई. जब सीबीएसई का रिजल्ट आया, तो वेदांत को फिजिक्स (Physics) में उम्मीद से बहुत ही कम नंबर मिले. हैरान होकर जब उन्होंने बोर्ड से अपनी जांची हुई कॉपी (आंसर शीट) की स्कैन कॉपी मांगी, तो दंग रह गए. वेदांत ने पाया कि बोर्ड ने उन्हें जो कॉपी भेजी है, उस पर हैंडराइटिंग उनकी थी ही नहीं. वह किसी और बच्चे की आंसर शीट थी.

वेदांत ने इस गड़बड़ी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर शेयर कर दिया. देखते ही देखते उनकी पोस्ट वायरल हो गई और उस पर 2.5 मिलियंस से ज्यादा व्यूज आ गए. भारी दबाव के बाद आखिरकार सीबीएसई ने अपनी गलती मानी. वेदांत की असली कॉपी उनके ईमेल पर भेजी और रिजल्ट को सुधारा.

2. सार्थक सिद्धांत (झारखंड)

रांची के रहने वाले 17 साल के सार्थक सिद्धांत खुद इस साल सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में बैठे थे. जब उन्होंने मार्किंग सिस्टम में गड़बड़ी देखी, तो अपनी कॉपी मंगवाई. वे सिर्फ अपनी कॉपी तक नहीं रुके, बल्कि सीधे सीबीएसई के टेंडर के कागजातों की जासूसी शुरू कर दी. सार्थक ने सीबीएसई के पुराने और नए RFP (Request for Proposal) यानी टेंडर डाक्यूमेंट्स की तुलना करते हुए अपने ब्लॉग पर 15 बड़ी कमियां उजागर कीं. 

सार्थक के आरोप और असर क्या हुआ

सार्थक ने आरोप लगाया कि सीबीएसई ने नियमों में कुछ ऐसे बदलाव किए जिससे कोएम्प्ट एडुटेक (Coempt Edutech), जो पहले ग्लोबारेना नाम से जानी जाती थी. को फायदा पहुंचे और टाटा (TCS) जैसी बड़ी कंपनी को पीछे छोड़ दिया जाए. सार्थक के मुताबिक, कोएम्प्ट का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा नहीं था और पहले उस पर ब्लैकलिस्ट होने के आरोप भी थे, लेकिन नए टेंडर में पहले ब्लैकलिस्टेड की जगह मौजूदा समय में ब्लैकलिस्टेड शब्द कर दिया गया ताकि वह क्वालिफाई कर सके.

इस 17 साल के लड़के की इस रिपोर्ट (Original Reporting) ने पूरे देश के नेताओं का ध्यान खींचा. सार्थक की इस 7 पन्नों की रिपोर्ट को बकायदा संसद की एजुकेशन कमेटी के सामने पेश किया गया, जहां सार्थक खुद गवाही देने पहुंचा. हालांकि, सीबीएसई और कोएम्प्ट कंपनी ने इन आरोपों को खारिज किया है.

निसर्ग अधिकारी

जब देश भर में रिजल्ट और टेंडर को लेकर राजनीति गर्म थी, तभी डिजिटल दुनिया से एक और बड़ा धमाका हुआ. 19 साल के एक युवा साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर निसर्ग अधिकारी ने दावा किया कि सीबीएसई का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल, जहां टीचर्स लॉगिन करके बच्चों के नंबर चढ़ाते हैं, वह सुरक्षा के मामले में बेहद कमजोर था. निसर्ग ने देखा कि सीबीएसई का यह पोर्टल लिंक पूरी तरह पब्लिक था. जब उसने इसके कोड की जांच की, तो उसे जो मिला वह डराने वाला था. निसर्ग के मुताबिक, वेबसाइट के पब्लिक कोड (JavaScript Bundle) के अंदर ही एक मास्टर पासवर्ड साफ अक्षरों में लिखा हुआ था. कोई भी हैकर सिर्फ परीक्षक (Examiner) की यूजर आईडी और स्कूल कोड डालकर, इस मास्टर पासवर्ड के जरिए बिना किसी OTP के सीधे सिस्टम में घुस सकता था.

निसर्ग ने बैक-टू-बैक खुलासे किए

1. निसर्ग ने बताया कि इस पोर्टल का OTP सिस्टम भी सिर्फ एक दिखावा था. सर्वर खुद ही ब्राउजर को सही OTP भेज देता था और ब्राउजर खुद ही उसे चेक कर लेता था. यानी हैकर बिना असली OTP के भी लॉगिन बाईपास कर सकता था.

2. टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह सच था, तो कोई भी हैकर किसी भी स्टूडेंट के नंबर देख और बदल सकता था. निसर्ग ने इसकी रिपोर्ट सरकारी एजेंसी CERT-In को फरवरी में ही कर दी थी, लेकिन महीनों तक इसे ठीक नहीं किया गया.

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