CBSE Class 12 Result Controversy: बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद जहां बच्चों के चेहरों पर खुशी होनी चाहिए थी, वहीं इस बार हर तरफ गुस्सा और टेंशन का माहौल है. इस साल सीबीएसई ने कॉपियां चेक करने के लिए एक नया तरीका अपनाया, जिसे ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम कहा जाता है. बोर्ड को उम्मीद थी कि इस डिजिटल तरीके से काम आसान और सटीक होगा, लेकिन हुआ बिल्कुल उलट. नतीजे आने के बाद से ही छात्रों, पेरेंट्स और खुद कॉपियां जांचने वाले टीचर्स ने इस नए सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है. आलम यह है कि जो सिस्टम कभी टांसपरेंसी का दावा कर रहा था, आज वही खुद सीबीएसई के लिए गले की हड्डी बन चुका है. आइए जानते हैं कि आखिर इस पूरे मामले में क्या-क्या गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिन्होंने इस समय भारी विवाद खड़ा कर दिया है.
ये 4 बड़ी गड़बड़ियां बनीं CBSE के जी का जंजाल
1. धुंधली कॉपियां (Blur Answer Sheets)
जब छात्रों ने अपने नंबरों से असंतुष्ट होकर अपनी कॉपियों की डिजिटल कॉपी मंगवाई, तो उनके होश उड़ गए. बहुत से बच्चों को जो आंसर शीट मिली हैं, वे इतनी धुंधली (Blur) हैं कि उन पर लिखे शब्द साफ-साफ पढ़े भी नहीं जा रहे हैं. अब छात्रों का सवाल है कि जब कॉपी इतनी धुंधली स्कैन हुई थी, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर देखकर टीचर ने उस पर नंबर कैसे दिए होंगे.
2. कॉपी मिसमैच और सॉफ्टवेयर का फॉल्ट
टीचर्स का आरोप है कि कॉपियां जांचने वाला सॉफ्टवेयर बेहद धीमा है और उसमें कई तकनीकी कमियां हैं. जल्दबाजी और सॉफ्टवेयर एरर के कारण कुछ जरूरी जवाब चेक होने से ही छूट गए. यहां तक कि स्टेप-मार्किंग (हर सही लाइन पर मिलने वाले नंबर) का नियम भी इस स्क्रीन चेकिंग में कहीं खो गया, जिससे टैलेंटेड बच्चों के नंबर भी बहुत कम हो गए.
3. वेबसाइट ठप, छात्र परेशान
रिजल्ट से नाराज बच्चे जब दोबारा नंबर चेक कराने (Re-Evaluation) के लिए बोर्ड की वेबसाइट पर जा रहे हैं, तो भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट ही ठप पड़ी है. टेक्निकल एरर की वजह से आवेदन नहीं हो पा रहे हैं. छात्रों को डर सता रहा है कि अगर समय रहते फॉर्म नहीं भरा गया, तो उनका पूरा साल बर्बाद हो जाएगा. इस पर अब सीबीएसई ने आईआईटी से मदद मांगी है.
4. 'थ्री लैंग्वेज सिस्टम' लेकिन अलग से छिड़ी जंग
सीबीएसई की मुश्किलें सिर्फ कॉपियों तक सीमित नहीं हैं. बोर्ड ने इसी बीच 9वीं और 10वीं क्लास के लिए नया 'थ्री लैंग्वेज सिस्टम' (तीन भाषाओं का नियम) लागू कर दिया है. इसके तहत दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी कर दिया गया है. तमिलनाडु जैसे गैर-हिंदी भाषी राज्यों में इसका भारी विरोध हो रहा है. राजनीतिक दलों का कहना है कि यह हिंदी थोपने की कोशिश है, जबकि स्कूलों के पास न तो नए लैंग्वेज टीचर्स और न ही किताबें हैं.
CBSE और शिक्षा मंत्रालय का क्या कहना है
हर तरफ से हो रही किरकिरी और शिक्षा मंत्रालय पर बढ़ते दबाव के बीच स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार और सीबीएसई ने मोर्चा संभाला है. बोर्ड ने इन गड़बड़ियों के दावों को पूरी तरह खारिज तो नहीं किया, लेकिन उनका कहना है कि देश में इस सिस्टम की शुरुआत 2014 में ही हो गई थी और दुनिया के बड़े-बड़े इंस्टीट्यूट कंप्यूटर स्क्रीन पर ही कॉपियां जांचते हैं. यह पूरी तरह सेफ है. बोर्ड ने कहा है कि छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है. अगर किसी को लगता है कि उसके साथ नाइंसाफी हुई है, तो री-चेकिंग के दरवाजे खुले हैं. विरोध बढ़ता देख बोर्ड ने कॉपियां दोबारा चेक कराने की फीस भी थोड़ी कम कर दी है.
अगर आपके नंबर भी कम आए हैं, तो आपके पास क्या ऑप्शन हैं
1. आप दोबारा से अपने नंबर को वैरिफाई (Verification of Marks) करवा सकते हैं. अप्लाई करके देख सकते हैं कि कहीं नंबर जोड़ने में तो कोई गलती नहीं हुई.
2. आप अपनी चेक की गई डिजिटल कॉपी खुद डाउनलोड करके देख सकते हैं.
3. अगर आपको लगता है कि किसी खास सवाल का जवाब सही होने पर भी नंबर नहीं मिले या टीचर ने उसे छोड़ दिया है, तो आप उस सवाल को दोबारा चेक (Re-Evaluation) करवा सकते हैं.
4. अगर आप बहुत ज्यादा मेंटल स्ट्रेस या कन्फ्यूजन में हैं, तो सीबीएसई के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-11-8004 पर बात कर सकते हैं या फिर resultcbse2026@gmail.com पर अपनी प्रॉब्लम मेल कर सकते हैं.
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