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CBSE 12th Result: आखिर क्यों ऑन-स्क्रीन मार्किंग के बावजूद 13 हजार आंसर शीट की गई मैन्युअली चेक, जानें वजह

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 12वीं की परीक्षाओं में ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली को लेकर कहा, ‘ इस साल कक्षा 12वीं की 98 लाख उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन की गईं और इस प्रक्रिया में सुरक्षा के तीन स्तर अपनाए गए.

CBSE 12th Result: आखिर क्यों ऑन-स्क्रीन मार्किंग के बावजूद 13 हजार आंसर शीट की गई मैन्युअली चेक, जानें वजह
बोर्ड ने कहा, मुंबई यूनिवर्सिटी, DU, इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और IB बोर्ड भी OSM का इस्तेमाल करते हैं.

विद्यालय शिक्षा सचिव संजय कुमार और सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह ने आज ऑन-स्क्रीन मार्किंग को लेकर चल रहे विवाद पर प्रेस कॉन्फेंस की. इस दौरान सीबीएसई अध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा, 12वीं के जो नतीजे घोषित हुए हैं, उनमें OSM मार्किंग की गई थी. छात्रों को लगता है कि पास होने का प्रतिशत 88 से घटकर 85 यानी 3% कम हो गया है. छात्रों को लगता है कि उन्हें जितने अंक मिले हैं, उससे ज़्यादा मिलने चाहिए थे. OSM को 2014 में CBSE ने शुरू किया था. लेकिन उस समय टेक्नोलॉजी की कमी के कारण OSM को पूरी तरह से लागू करना संभव नहीं था. लेकिन अब हमारे पास टेक्नोलॉजी मौजूद थी, इसलिए हमने इसे पूरी तरह से लागू किया.

11 मई तक चेकिंग चली

मुंबई यूनिवर्सिटी, DU, इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और IB बोर्ड भी OSM का इस्तेमाल करते हैं. यह एक वैश्विक चलन है, इसमें कुछ भी नया नहीं है. इस बार की 12वीं की परीक्षाओं में, आंसर शीट को स्कैन करके उनकी PDF कॉपियाँ तैयार की गईं. 98 लाख आंसर की थी. स्कैनिंग में सुरक्षा के 3 स्तर होते हैं. सचिव बताया कि 90 लाख कॉपी में से कुल 13 हज़ार ऐसी कॉपी थी जो कई बार स्कैन करने के बाद से भी सही से स्कैन नहीं हो पाया.  ऐसी सभी कॉपियों को 11 मई तक चेक किया गया था. फिर 13 मई को रिजल्ट जारी किया गया

स्टेप बाय स्टेप मार्किंग सिस्टम पर राहुल सिंह ने कहा,  हम हर साल बच्चों को विस्तृत और स्टेप बाय स्टेप लिखने के लिए कहते है. बोर्ड परीक्षाओं में हमेशा से स्टेप-वाइज असेसमेंट पर ज़ोर दिया गया है. निर्देशों में साफ़ तौर पर कहा जाता है कि स्टेप मार्क्स दिए जाने चाहिए. मैथ्स या साइंस में एक सवाल को हल करने के कई तरीके हो सकते हैं. सभी मॉडल मार्किंग स्कीम में बताए जाते हैं. मुझे नहीं लगता कि OSM को लेकर शिक्षकों की ट्रेनिंग में किसी तरह की कमी रही है. स्टेप मार्क्स देना ज़रूरी है और अगर किसी सवाल को हल करने के लिए कोई वैकल्पिक तरीका इस्तेमाल किया गया है, जो मार्किंग स्कीम में उल्लेखित है, तो उसके लिए भी स्टेप मार्क्स दिए जाते हैं.

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