CBSE OSM Marking Scheme Controversy: पिछले कुछ दिनों से शिक्षा व्यवस्था को लेकर जो सवाल उठे हैं, उनकी असली पड़ताल छात्रों के बीच जाकर ही हो सकती है. बच्चों के भविष्य को लेकर उनके मन में उठ रहे सवालों, घबराहट और डर को समझने के लिए एनडीटीवी उनके बीच पहुंचा. डीपीएस (DPS) मथुरा रोड के छात्रों ने एनडीटीवी को बताया कि CBSE ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) में असली दिक्कत कहां है और वो अब क्या चाहते हैं. इस दौरान छात्रों के पेरेंट्स और एजुकेशन सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट्स भी मौजूद रहे. छात्रों ने साफ कहा कि सीबीएसई ने जल्दबाजी में OSM लागू किया और अब इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है. NDTV की सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर सुचारिता कुकरेती ने इस दौरान छात्रों से ये सवाल किए-
सवाल - आपने अभी 12वीं की परीक्षा दी है, तो मुझे बताइए हुआ क्या?
छात्रा आशी मित्तल का जवाब: मेरे 12वीं में 95.2% आए थे, लेकिन मैं रिजल्ट से खुश नहीं थी. उदाहरण के लिए- इंग्लिश, लीगल स्टडीज और हिस्ट्री में 93% आए थे. मैंने रिवैल्यूएशन के लिए कॉपी भेजी. आखिरकार 25 मई को हमें आंसर शीट्स मिलीं, लेकिन कई दोस्तों को तो अभी तक नहीं मिली हैं. जब मैंने इंग्लिश की कॉपी देखी, तो मेरा पूरा पेपर सही था. एक 5 नंबर के आंसर में एक्जामिनर ने हर जगह टिक कर रखा था, लेकिन मार्क्स नहीं दे रखे थे. ऐसे ही लीगल स्टडीज में पूरे-पूरे आंसर्स में आधा-आधा नंबर दिया था. मार्किंग स्कीम से मिलाने पर मेरा आंसर एकदम सही और लंबा था. इ
सवाल - तो आपको क्या लगता है क्या होना चाहिए था?
आशी मित्तल: मुझे लगता है कि OSM (ऑन स्क्रीन मार्किंग) को लागू करने से पहले अच्छे से टेस्ट करना चाहिए था. इसे 'Ad-hoc' तरीके से लागू करना गलत था.
सवाल - अभी जिस तरह से नीट (NEET) का पेपर लीक हुआ है और ये सब हो रहा है, क्या आप लोगों के मन में डर लगता है?
एक अन्य छात्र: हां, हमें भी डर लगता है कि हमारे पेपर भी गलत तरीके से चेक किए जा सकते हैं. मेरे हिसाब से जो सीबीएसई का पहले से चलता हुआ फिजिकल सिस्टम था, उसी को वापस ला देना चाहिए OSM की जगह.
सवाल - आपको 12वीं के छात्रों के साथ जो हुआ, उसे देखकर कुछ डर लगता है?
छात्रा का जवाब - बिल्कुल, हमें आसपास के छात्रों को देखकर यही लगता है कि ऐसा हमारे साथ भी हो सकता है. मुझे लगता है कि सभी बच्चों में यही डर है कि हमारा फ्यूचर सिक्योर है या नहीं.
सवाल - आप थर्ड लैंग्वेज (तीन लैंग्वेज फॉर्मूला) के बारे में क्या सोचती हैं, जो अब 9वीं कक्षा में लागू किया गया है?
छात्रा का जवाब: ये बहुत अजीब और बर्डनिंग है. 8वीं तक हमने कुछ और पढ़ा है और 9वीं में अचानक से हमें नई लैंग्वेज पढ़ने को कहा जा रहा है. ये मानसिक तौर पर बहुत नेगेटिव प्रभाव डालेगा. बच्चे दुखी हैं, क्योंकि नंबर कम आएंगे और वो डिमोटिवेट हो सकते हैं.
यहां देखें पूरा कार्यक्रम -
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं