Degree vs Skills : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में करियर और पढ़ाई को लेकर छात्रों और अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं. क्या सिर्फ डिग्री से नौकरी मिल पाएगी? भविष्य में कौन-सी स्किल्स सबसे ज्यादा काम आएंगी? क्या AI नौकरियों के लिए खतरा है? इन सभी सवालों के जवाब दे रहे हैं मेधावी स्किल्स यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर प्रवेश दुदानी. उनका मानना है कि भविष्य सिर्फ डिग्री का नहीं, बल्कि डिग्री और स्किल्स के सही मेल का है. AI से डरने के बजाय स्टूडेंट्स को इसे अपने काम को बेहतर बनाने वाले टूल के रूप में अपनाना चाहिए.
डिग्री के साथ स्किल्स भी जरूरीसिर्फ डिग्री आज के समय में पर्याप्त नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि डिग्री की जरूरत खत्म हो गई है. रोजगारपरक स्किल एजुकेशन देना बहुत जरूरी है, ताकि जब हमारे स्टूडेंट्स प्रोफेशनल बनकर बाहर निकलें तो वह पहले दिन से ही अपने काम में अपने हुनर की छाप छोर सकें. उदाहरण के लिए, B.Com का छात्र अकाउंटिंग के साथ डेटा एनालिटिक्स, AI आधारित फाइनेंस टूल्स और कम्युनिकेशन भी सीखे. B.Sc का छात्र अपने विषय के साथ डिजिटल टूल्स और रिसर्च स्किल्स जोड़े. BA का छात्र लेखन, रिसर्च, डिजिटल कम्युनिकेशन और एआई टूल्स सीख सकता है. पढाई इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुकूल हो यही हमारा उद्देश्य होना चाहिये.
AI-Proof नौकरी नहीं, AI के साथ काम करने की क्षमता जरूरीआज डिग्री और स्किल में से किसी एक को चुनने का सवाल नहीं है. सवाल है कि आपकी डिग्री आपको काम करने के लिए कितना तैयार करती है. मैं छात्रों से कहूंगा कि 'AI-proof' नौकरी की तलाश करने के बजाय ऐसी स्किल डेवलप करें जिससे वे बदलती तकनीक के साथ काम कर सकें. क्योंकि जो तकनीक आज किसी काम को बदल रही है, वह कल किसी दूसरे काम को भी बदल सकती है.
छात्रों को क्रिटिकल थिंकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग, कम्युनिकेशन और लोगों के साथ काम करने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए. लेकिन केवल सॉफ्ट स्किल्स काफी नहीं हैं. अपने क्षेत्र की गहरी समझ भी जरूरी है. अगर आप अकाउंटिंग जानते हैं, तो एआई से अकाउंटिंग का काम बेहतर कर सकते हैं. अगर आप इंजीनियरिंग जानते हैं, तो एआई के साथ बेहतर समाधान बना सकते हैं. भविष्य में प्रतिस्पर्धा केवल इंसान और एआई के बीच नहीं होगी. कपीटिशन उन लोगों के बीच होगा जो एआई का इस्तेमाल करना जानते हैं और जो नहीं जानते.
AI को चैटबॉट नहीं, काम के टूल की तरह समझेंछात्रों को एआई को केवल एक चैटबॉट की तरह नहीं, बल्कि अपने विषय में काम आने वाले टूल की तरह सीखना चाहिए. इसके लिए सबसे पहले उन्हें अपने क्षेत्र की बुनियादी समझ मजबूत करनी होगी. फिर उन्हें यह सीखना होगा कि एआई से सही सवाल कैसे पूछें, उसका इस्तेमाल रिसर्च, डेटा एनालिसिस, कंटेंट, डिजाइन या तकनीकी समस्याओं में कैसे करें और उसके उत्तर की जांच कैसे करें.
हमारी शिक्षा में एआई को केवल एक अलग विषय के रूप में पढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा. एक अकाउंटिंग छात्र को अकाउंटिंग के काम में, एक इंजीनियरिंग छात्र को इंजीनियरिंग की समस्याओं में और एक हेल्थकेयर छात्र को अपने क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल करना सीखना चाहिए. एआई को पढ़ाई से अलग रखने के बजाय, पढ़ाई का हिस्सा बनाना होगा.
बदलती टेक्नोलॉजी के साथ शिक्षा भी बदलनी होगीयह शिक्षा व्यवस्था के सामने एक वास्तविक चुनौती है. अगर उद्योग बदल रहा है तो पढ़ाई को भी बदलना पड़ेगा. अगर हम बच्चों के लिए बदलते समय के साथ तालीम को नहीं बदलेंगे तो उनके लिए रोजगार की तैयारी मुश्किल हो जाएगी ये जाहिर सी बात है.
स्किल यूनिवर्सिटी का फायदा यह है कि वह पढ़ाई को केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं रखती. इंडस्ट्री के साथ मिलकर यह समझना जरूरी है कि काम के लिए कौन-सी क्षमताएं चाहिए और उन्हें छात्रों के सिलेबस और पढ़ाई में कैसे शामिल किया जाए. लेकिन केवल सिलेबस बदलना काफी नहीं है. छात्रों को वास्तविक कार्यस्थल पर सीखने, नई तकनीक इस्तेमाल करने और लगातार अपने कौशल को अपडेट करने के अवसर मिलने चाहिए.
क्या बढ़ रही है माइक्रो-क्रेडेंशियल्स और सर्टिफिकेशन की मांग?शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेशन और माइक्रो-क्रेडेंशियल्स की जरूरत निश्चित रूप से बढ़ रही है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से काम कर रहे हैं और अपनी स्किल्स अपडेट करना चाहते हैं. लेकिन इसे तीन या चार साल की डिग्री के विकल्प के रूप में देखना सही नहीं होगा.
एक छात्र जो 12वीं के बाद करियर शुरू कर रहा है, उसे व्यापक ज्ञान और मजबूत आधार की जरूरत होती है। वहीं कोई व्यक्ति जो पहले से अकाउंटिंग में काम कर रहा है, उसके लिए AI in Finance का छह महीने का प्रोग्राम बेस्ट हो सकता है.
कंपनियों के लिए भी केवल सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि उम्मीदवार उस स्किल का इस्तेमाल वास्तविक काम में कर सकता है या नहीं. मेरा मानना है कि भविष्य में डिग्री, स्किल-सर्टिफिकेशन और लगातार सीखना- तीनों साथ चलेंगे.
12वीं के बाद कोर्स चुनते समय क्या रखें ध्यान?मैं छात्रों और माता-पिता से कहूंगा कि केवल यह देखकर कोर्स न चुनें कि आज कौन-सी नौकरी सबसे ज्यादा चल रही है. क्योंकि एआई के दौर में नौकरियां और उनके काम करने के तरीके बदलते रहेंगे. पहले यह समझिए कि छात्र की रुचि किस क्षेत्र में है और वह किस तरह का काम करना चाहता है. उसके बाद देखिए कि कोर्स में कितनी मजबूत विषयगत पढ़ाई है, कितनी प्रैक्टिकल ट्रेनिंग है और इंडस्ट्री से कितना जुड़ाव है.
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