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This Article is From May 17, 2022

डीयू के दो कॉलेज दे रहे आईएएस की कोचिंग, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा नॉट अलाउड 

Delhi University Updates: दिल्ली विश्वविद्यालय के दो कॉलेज - स्वामी श्रद्धानंद और हंसराज - विश्वविद्यालय आईएएस कोचिंग की पेशकश कर रहे हैं वहीं अधिकारियों का कहना है कि "विशुद्ध रूप से सरकार द्वारा वित्त पोषित शैक्षणिक संस्थान" हैं और वे ऐसा नहीं कर सकते.

डीयू के दो कॉलेज दे रहे आईएएस की कोचिंग, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कहा नॉट अलाउड 
डीयू के दो कॉलेज दे रहे आईएएस की कोचिंग,
नई दिल्ली:

Delhi University Updates: दिल्ली विश्वविद्यालय के दो कॉलेज - स्वामी श्रद्धानंद और हंसराज - विश्वविद्यालय आईएएस कोचिंग की पेशकश कर रहे हैं वहीं अधिकारियों का कहना है कि "विशुद्ध रूप से सरकार द्वारा वित्त पोषित शैक्षणिक संस्थान" हैं और वे ऐसा नहीं कर सकते. डीयू के एकेडमिक काउंसिल के सदस्य डॉ आलोक पांडे ने कहा कि हंसराज कॉलेज पिछले साल से एक निजी संस्थान - बीकन इंस्टीट्यूट के साथ आईएएस कोचिंग दे रहा है, वहीं श्रद्धानंद कॉलेज ने हाल ही में इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है.

विश्वविद्यालय के डीन ऑफ कॉलेज, बलराम पाणि ने कहा कि जांच की जाएगी क्योंकि कॉलेजों को ऐसा करने की अनुमति नहीं है. हंसराज कॉलेज की वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस कोचिंग की फीस कक्षा 12वीं के प्रतिशत के आधार पर अलग-अलग है. तीन साल के कोचिंग कार्यक्रम के लिए न्यूनतम शुल्क 75,000 रुपये और अधिकतम 1,50,000 रुपये है. नोटिफिकेशन में लिखा, कोर्स शुल्क का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट / एनईएफटी / चेक के माध्यम में करना होगा. डीडी, 'प्रिंसिपल, हंसराज कॉलेज' के पक्ष में देय होना चाहिए." 

हंसराज कॉलेज में आईएएस कोचिंग कक्षाओं में प्रवेश दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी छात्रों के लिए खुला है. हंसराज कॉलेज की प्रिंसिपल रमा शर्मा ने पीटीआई के कॉल और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया. हालांकि, डीयू के कुलपति योगेश सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि ये कॉलेज इस तरह की कोचिंग दे रहे हैं. श्रद्धानंद कॉलेज के प्रिंसिपल प्रवीण गर्ग ने कहा कि वे आने वाले महीनों में कोचिंग शुरू करने की योजना बना रहे हैं और इस तरह के कार्यक्रम को शुरू करने का निर्णय "स्वतंत्र रूप से" लिया गया था.

नोटिफिकेशन के मुताबिक तीन साल की फीस 1,50,000 रुपये है. कॉलेज के छात्रों को 25 प्रतिशत छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी. उन्होंने कहा, "संस्थान पहले जून में छात्रों को परिचयात्मक कक्षाएं प्रदान करेगा और फिर हम कोचिंग के लिए छात्रों का नामांकन शुरू करेंगे. निर्णय स्वतंत्र रूप से लिया गया था और विश्वविद्यालय को इसके बारे में सूचित नहीं किया गया था." गर्ग ने कहा, "हमने कक्षाओं के संचालन के लिए सप्ताहांत के लिए संस्थान को संगोष्ठी कक्ष आवंटित करने का निर्णय लिया है. कक्षा में अधिकतम 80 छात्रों को नामांकन की अनुमति दी जाएगी." 

कॉलेजों के डीन बलराम पाणि ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी क्योंकि कॉलेजों को ऐसा करने की अनुमति नहीं है. "कॉलेजों को ऐसा करने की अनुमति नहीं है. वे एक शैक्षणिक संस्थान हैं. वे छात्रों को कोचिंग देना शुरू नहीं कर सकते हैं. मैं इसकी जांच करूंगा. वे अकादमिक उद्देश्यों के लिए विशुद्ध रूप से अकादमिक संस्थान हैं. वे केवल उन लोगों को कोचिंग नहीं दे सकते हैं जो भुगतान करते हैं.

कोचिंग अधिसूचना पर शिक्षण समुदाय से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, आलोक पांडे, जो रामानुजन कॉलेज में प्रोफेसर भी हैं, ने कहा कि यदि कॉलेज कोचिंग देना चाहते हैं तो उन्हें मामूली शुल्क लेना चाहिए. उन्होंने कहा, 'ये कॉलेज छात्रों से कोचिंग के लिए लाखों रुपये ले रहे हैं, हम मामला उठा रहे हैं और इस तरह की गतिविधियों को रोकना सुनिश्चित करेंगे, अगर वे कोचिंग देना चाहते हैं, तो उन्हें मामूली शुल्क लेना चाहिए.

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