गरीबी के बावजूद सफलता की एक नयी इबारत लिखने वाले युवकों की सूची में एक रिक्शा चालक के बेटे ने अपना नाम दर्ज कराया है और मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के लिए नीट की परीक्षा पास की है.
अपने परिवार का लालन-पालन करने के लिए 24 वर्षीय शेख सहजान हुसैन के पिता रिक्शा चलाते हैं. शेख ने प्रवेश परीक्षा पास की है और वह राज्य में किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के योग्य हो गये हैं.
सहजान के पिता शेख अबुतलिब ने बताया, सहजान मेरे तीन बेटों में सबसे छोटा है. मेरा केन्द्रपाड़ा में साइकिल मरम्मत की एक दुकान थी. 1999 के चक्रवात में दुकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. कोई दूसरा विकल्प नहीं देख कर मैंने अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए रिक्शा चलाने का निर्णय लिया. मशीनीकृत ऑटो रिक्शा लोकप्रिय हो रहा है, ऐसे में रिक्शा चलाने का काम मंदा हो गया है. मैंने रिक्शा चलाना बंद कर दिया.
सहजान ने बताया, स्कूल और कॉलेज में अकादमिक रूप से मेरा करियर अच्छा नहीं था. मैंने केन्द्रपाड़ा सरकारी उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास की और केन्द्रपाड़ा स्वायत्त महाविद्यालय से फिजिक्स ऑनर्स में प्रथम श्रेणी से परीक्षा पास की. छोटी उम्र से ही मैंने गरीबी की दिक्कतों का सामना किया. तब मैंने संकल्प लिया मैं पढ़ाई में अच्छा करूं ताकि अपने पेरेंट्स को अच्छी जिंदगी दे सकूं. दो साल पहले मैंने डॉक्टर बनने का सपना लिया था.
(इनपुट न्यूज एजेंसी भाषा से भी)
अपने परिवार का लालन-पालन करने के लिए 24 वर्षीय शेख सहजान हुसैन के पिता रिक्शा चलाते हैं. शेख ने प्रवेश परीक्षा पास की है और वह राज्य में किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के योग्य हो गये हैं.
सहजान के पिता शेख अबुतलिब ने बताया, सहजान मेरे तीन बेटों में सबसे छोटा है. मेरा केन्द्रपाड़ा में साइकिल मरम्मत की एक दुकान थी. 1999 के चक्रवात में दुकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. कोई दूसरा विकल्प नहीं देख कर मैंने अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए रिक्शा चलाने का निर्णय लिया. मशीनीकृत ऑटो रिक्शा लोकप्रिय हो रहा है, ऐसे में रिक्शा चलाने का काम मंदा हो गया है. मैंने रिक्शा चलाना बंद कर दिया.
सहजान ने बताया, स्कूल और कॉलेज में अकादमिक रूप से मेरा करियर अच्छा नहीं था. मैंने केन्द्रपाड़ा सरकारी उच्च विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास की और केन्द्रपाड़ा स्वायत्त महाविद्यालय से फिजिक्स ऑनर्स में प्रथम श्रेणी से परीक्षा पास की. छोटी उम्र से ही मैंने गरीबी की दिक्कतों का सामना किया. तब मैंने संकल्प लिया मैं पढ़ाई में अच्छा करूं ताकि अपने पेरेंट्स को अच्छी जिंदगी दे सकूं. दो साल पहले मैंने डॉक्टर बनने का सपना लिया था.
(इनपुट न्यूज एजेंसी भाषा से भी)
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