- महात्मा गांधी की आज पुण्यतिथि है.
- महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1948 में की गई थी.
- नमक सत्याग्रह बापू द्वारा चलाये गये प्रमुख आंदोलनों में से एक था.
महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की आज पुण्यतिथि (Mahatma Gandhi Death Anniversary 2019) है. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की 30 जनवरी 1948 को नाथूराम ने गोली मारकर हत्या (Mahatma Gandhi Death) कर दी थी. भारत की आजादी के लिए महात्मा गांधी ने कई आंदोलन किए थे. महात्मा गांधी को इसी कारण कई बार जेल जाना पड़ा था. महात्मा गांधी किसी साधन की बजाय पैदल चलने को तरजीह देते थे. नमक सत्याग्रह के दौरान गांधीजी ने 24 दिनों तक रोज औसतन 16 से 19 किलोमीटर पैदल यात्रा की. दांडी यात्रा (Dandi March) से पहले बिहार के चंपारन में सत्याग्रह के दौरान भी गांधीजी बहुत पैदल चले थे. नमक सत्याग्रह महात्मा गांधी द्वारा चलाये गये प्रमुख आंदोलनों में से एक था. महात्मा गांधी ने 12 मार्च, 1930 में अहमदाबाद के पास स्थित साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था. दांडी मार्च (Dandi March) जिसे नमक मार्च, दांडी सत्याग्रह के रूप में भी जाना जाता है 1930 में महात्मा गांधी के द्वारा अंग्रेज सरकार के नमक के ऊपर कर लगाने के कानून के विरुद्ध किया आंदोलन था.

दांडी मार्च की तस्वीर
गांधी जी (Mahatma Gandhi) ने अपने 78 स्वयं सेवकों, जिनमें वेब मिलर भी एक था, के साथ साबरमती आश्रम से 358 कि.मी. दूर स्थित दांडी के लिए प्रस्थान किया. 24 दिनों की यात्रा के बाद 6 अप्रैल, 1930 को दांडी पहुंचकर उन्होंने समुद्रतट पर नमक क़ानून को तोड़ा. महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा के दौरान सूरत, डिंडौरी, वांज, धमन के बाद नवसारी को यात्रा के आखिरी दिनों में अपना पड़ाव बनाया था. नवसारी से दांडी का फासला लगभग 13 मील का है.
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बता दें कि भारत में अंग्रेजों के शाशनकाल के समय नमक उत्पादन और विक्रय के ऊपर बड़ी मात्रा में कर लगा दिया था और नमक जीवन जरूरी चीज होने के कारण भारतवासियों को इस कानून से मुक्त करने और अपना अधिकार दिलवाने हेतु ये सविनय अवज्ञा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. कानून भंग करने के बाद सत्याग्रहियों ने अंग्रेजों की लाठियाँ खाई थी परंतु पीछे नहीं मुड़े थे. इस आंदोलन में कई नेताओं को गिरप्तार कर लिया. ये आंदोलन पूरे एक साल चला और 1931 को गांधी-इर्विन समझौते से खत्म हो गया.
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