यह ख़बर 14 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

केयर्न-वेदांता सौदे को सेबी की मंजूरी

खास बातें

  • इस सौदे की घोषणा अगस्त 2010 में की गई थी और तब से इसे सरकार और सेबी से मंजूरी का इंतजार था।
New Delhi:

बाजार नियामक सेबी ने प्रवासी भारतीय अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाली वेदांता रिसोर्सेज द्वारा केयर्न इंडिया के अधिग्रहण की मंजूरी दे दी। इस मंजूरी से 9.6 अरब डॉलर के इस सौदे के रास्ते में बड़ी बाधा दूर हो गई। इस सौदे की घोषणा अगस्त 2010 में की गई थी और तब से इसे सरकार और सेबी से मंजूरी का इंतजार था। बहरहाल, सरकार की तरफ से सौदे को अभी मंजूरी नहीं मिली है। ब्रिटेन की ऊर्जा कंपनी केयर्न एनर्जी ने भारत स्थित अपनी अनुषंगी केयर्न इंडिया में बहुलांश हिस्सेदारी वेदांता समूह को बेचने का सौदा किया है। अधिग्रहणकर्ता से सौदे के बारे में कई स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद सेबी ने सौदे के तहत शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश की अनिवार्यता पर अपनी राय दी है। किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में 15 फीसद या उससे अधिक हिस्सेदारी के अधिग्रहण के मामले में कंपनी को आम जनता से 20 फीसद शेयरों की खरीदारी की खुली पेशकश करना जरूरी है। साथ ही उसके लिए सेबी से मंजूरी हासिल करना भी जरूरी है। केयर्न इंडिया में 51 फीसद तक हिस्सेदारी हासिल करने के सौदे की घोषणा के तुंरत बाद वेदांता समूह ने इस अनिवार्य खुली पेशकश के बारे में सेबी से मंजूरी मांगी थी। वेदांता ने 17 अगस्त को घोषित सार्वजनिक पेशकश में 355 रुपये प्रति शेयर में केयर्न शेयरधारकों से 20 फीसद हिस्सेदारी खरीदने की पेशकश की थी। कुल 13,631 करोड़ रुपये की खुली पेशकश पहले 11 अक्तूबर को खुलनी और 30 अक्तूबर को बंद होनी थी लेकिन मामले में सेबी से मंजूरी मिलने में देरी के कारण इसमें विलम्ब हुआ। कंपनी अब खुली पेशकश के लिये नये सिरे से तिथि की घोषणा करेगी। सौदे को फिलहाल आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति :सीसीईए: की मंजूरी का इंतजार है। पिछले महीने पेट्रोलियम मंत्रालय ने सीसीईए के लिये नोट जारी किया था लेकिन सभी मंत्रालयों से इस बारे में प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी है। वित्त, कानून, गृह, पर्यावरण और कंपनी मंत्रालयों से प्रतिक्रिया मिलने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय मामले को सीसीईए के पास ले जाएगा।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com