अमेरिका में आईटी फील्ड में नौकरियां इस साल कम पैदा हुई हैं... (प्रतीकात्मक फोटो)
खास बातें
- अमेरिका में आईटी में इस साल हुईं कम नौकरियां जेनरेट
- अगले साल भी रह सकते हैं ऐसे ही हालात
- रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है
नई दिल्ली: अमेरिका में आईटी क्षेत्र में इस साल अब तक जितनी नौकरियां पैदा हुई हैं, वह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले आधा है. कंसल्टिंग फर्म जानको असोसिएट्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है.
ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के इस अध्ययन से प्राप्त हुए डाटा के मुताबिक, जनवरी से अक्टूबर यानी 10 महीनों के बीच अमेरिका में 6,6600 नई आईटी नौकरियां उत्पन्न हुईं. जबकि यदि पिछले साल इन्हीं महीनों में अमेरिका के आईटी क्षेत्र में 114,000 नौकरियां जेनरेट हुई थीं.
जानको असोसिएट्स के सीईओ एमवी जैनुलैटिस के मुताबिक, यदि पिछले 24 महीने का डाटा देखें तो स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि आईटी में नई नौकरियों का सृजन घटता जा रहा है. उन्होंने पूर्वानुमान लगाया कि साल 2016 में आईटी नौकरियों का सृजन साल 2013 के स्तर पर रहेगा.
जानको विश्लेषण के मुताबिक, 2013 में 7,5000 नई (आईटी) नौकरियां पैदा हुई थीं. जबकि, साल 2014 में 130,000 नई नौकरियां और साल 2015 में 112,500 नई नौकरियां आईटी फील्ड में जेनरेट हुई थीं. जैनुलैटिस ने इसके लिए इकॉनमिक कारकों के अतिरिक्त, ब्रेक्जिट से जुड़ी अनिश्चितताओं के चलते हायरिंग कम किया जाना भी एक कारण बताया. इसके अलावा अमेरिकी चुनाव, इमीग्रेशन पॉलिसी भी इस बाबत प्रभावकारी कारक रहे.
उन्होंने बताया- इस सुस्ती की वजह सिर्फ इकॉनमिक कारक नहीं हैं. कंपनियां हायरिंग कर ही नहीं रही हैं. जब तक ब्रेक्जिट के बाद पड़ने वाले प्रभावों को लेकर बाजारों पर असर डालने वाले कारकों को लेकर तस्वीर साफ नहीं होगी, यह जारी रह सकता है. बाजार पर प्रभाव डालने वाले कारक जैसे की पेरिस समझौता, ब्रेक्जिट, आव्रजन नीतियां और उनका यूएस व विदेशों में लागू किया जाना और साथ ही मिडिल ईस्ट में उठापटक को लेकर पैदा हुई अनिश्चितताओं पर तस्वीर साफ हो, इसके बाद कुछ बदलाव देखा जा सकता है.
2017 में भी आईटी जॉब्स को लेकर कोई खुशनुमा तस्वीर नहीं है. कई कंपनियां 2017 में सुस्ती की आशंका में बजट टाइट रख सकती हैं. उन्होंने बताया- कई कंपनी ऐग्जेक्यूटिव अनिष्ट की आशंका से ऐहतियाती कदम उठा रहे हैं और नए साल में कंपनी बजट फ्लैट या कम रखने का पूर्वानुमान लगा रहे हैं. एक आम राय यह बन रही है कि पहले ही अधिक खर्च कर देने और बाद में खर्चों में कटौती कर देने से ज्यादा आसान है पहले ही कम खर्चे कर लेना.