यह ख़बर 15 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

अभी बरकरार है मुद्रास्फीति का जोखिम : रिजर्व बैंक

खास बातें

  • केंद्रीय बैंक ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि में आई नरमी के बावजूद मुद्रास्फीति का जोखिम अब भी बरकरार है और इसी से आगे की स्थिति तय होगी।
मुंबई:

रिजर्व बैंक ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि में नरमी के बावजूद मुद्रास्फीति का जोखिम अब भी बना हुआ है। ऐसे में भविष्य में ब्याज दरों में नरमी कब होगी और कितनी होगी, यह मुद्रास्फीति की स्थिति पर ही निर्भर करेगा। रिजर्व बैंक ने मध्य तिमाही समीक्षा में कहा, ‘‘पिछले दिनों आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति को लेकर जो स्थितियां बनी थीं, उससे रिजर्व बैंक यह संकेत देने को प्रेरित हुआ था कि आगे ब्याज दरों में और वृद्धि नहीं होगी और उसका आगे का कदम ब्याज दरों में गिरावट लाने वाला होगा।’’

बहरहाल, केंद्रीय बैंक ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि में आई नरमी के बावजूद मुद्रास्फीति का जोखिम अब भी बरकरार है और इसी से आगे की स्थिति तय होगी। उल्लेखनीय है कि फरवरी माह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 6.95 प्रतिशत रही है। जनवरी माह में यह 6.55 प्रतिशत रही थी। मुद्रास्फीति को फिर से मजबूती का रुख बनने के बाद रिजर्व बैंक सतर्क हो गया।

चालू वित्तवर्ष के दौरान अप्रैल से दिसंबर के दौरान साल दर साल आधार पर मुद्रास्फीति नौ प्रतिशत से ऊपर बनी रही और उसके बाद यह कुछ नरम पड़कर दिसंबर में 7.7 प्रतिशत और जनवरी 2012 में 6.6 प्रतिशत पर आ गई थी, लेकिन फरवरी में वापस यह सात प्रतिशत के दायरे में पहुंच गई। इस दौरान मुद्रासफीति में प्राथमिक खाद्य पदार्थों के साथ साथ ईंधन और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई का भी योगदान रहा।

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प्राथमिक खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति दिसंबर में जहां घटकर 0.8 प्रतिशत रह गई थी। जनवरी में यह शून्य से नीचे चली गई और 0.5 प्रतिशत रह गई। हालांकि फरवरी में यह वापस उछलकर 6.1 प्रतिशत हो गई। हालांकि, इस दौरान कच्चे तेल के दाम में भारी वृद्धि के बावजूद ईंधन समूह की मुद्रास्फीति दिसंबर में जहां 15 प्रतिशत रही, वहीं फरवरी में घटकर 12.8 प्रतिशत रह गई।