खास बातें
- प्रमुख दूरसंचार कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने बुधवार को कुछ केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात की और दूरसंचार नियामक के प्रस्ताव के विरुद्ध अपनी चिंता का इजहार किया।
नई दिल्ली: प्रमुख दूरसंचार कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने बुधवार को कुछ केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात की और दूरसंचार नियामक के प्रस्ताव के विरुद्ध अपनी चिंता का इजहार किया।
भारती एयरटेल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुनील भारती मित्तल, वोडाफोन समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विट्टोरियो कोलाओ, टेलीनॉर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉन फ्रेड्रिक बक्सास और आदित्य बिड़ला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला ने लगभग पूरा दिन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और केंद्रीय संचार मंत्री कपिल सिब्बल तथा अधिकारियों से मिलने में बिताया।
मुलाकात के बाद सिब्बल ने कहा कि कम्पनियों के प्रमुखों ने नियामक के प्रस्तावों पर अपनी चिंता जताई और उन्होंने उनसे मामले पर गौर करने का आश्वासन दिया। बिड़ला ने मुलाकात के बाद कहा, 'सरकार ने कहा है कि वह मामले पर विचार कर रही है।'
उन्होंने कहा कि सरकार ने संकेत दिया है कि गम्भीरता पूर्वक विचार करने के बाद ही प्रस्तावित स्पेक्ट्रम नीलामी के नियमों पर फैसला लिया जाएगा। मित्तल ने कहा, "हमारा मानना है कि सिफारिशें पूरी तरह गलत और बेतुकी हैं। शायद नियामक ने पहले फैसला कर लिया और बाद में उसके तर्क खोज लिए। कुल मिलाकर आज नियामक संस्था से जो कुछ भी बाहर आ रहा है वह देश के दूरसंचार उद्योग को बर्बाद करने जैसा है।"
बक्सास ने कहा, "सिर्फ सरकार के साथ ही राजनीतिक जवाबदेही जुड़ी है इसलिए नीति पर आखिरी फैसला उसी का होना चाहिए। हमारा सरकार से अनुरोध है कि वह आवश्यक राजनीतिक पहल करे। यह तय किए जाने की जरूरत है कि नीति में खरीदे जा सकने की क्षमता, प्रतियोगिता और निवेश का ध्यान रखा जाए।"
उल्लेखनीय है कि करीब 10 दिनों पहले भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए वर्तमान कीमत से 10 गुना अधिक बेस मूल्य का प्रस्ताव रखा है। नियामक ने साथ ही कुछ अन्य बातों के साथ बैंडविड्थ के एक हिस्से की ही नीलामी का प्रस्ताव रखा है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने नीलामी के लिए अपनी ओर से सुझाव रखा है, जिसका उद्योग जगत ने तीखा विरोध किया है। कम्पनियों ने पिछले सप्ताह एक संयुक्त पत्र में सिब्बल से आग्रह किया था कि वह प्राधिकरण की सिफारिशों को स्वीकार नहीं करें। अन्यथा कॉल दरें 25 से 30 फीसदी बढ़ सकती हैं। उन्होंने साथ ही बेस मूल्य को 80 फीसदी तक घटाने और सभी उपलब्ध स्पेक्ट्रम की नीलामी का अनुरोध किया था।