खास बातें
- वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार कर प्रस्तावों पर मिले सुझावों की जांच परख कर रही है।
New Delhi: निजी अस्पतालों और चिकित्सा जांच पर सेवाकर लगाने के प्रस्ताव को लेकर जनता, चिकित्सक और उद्योग जगत से मिली तीखी प्रतिक्रिया के बाद वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार कर प्रस्तावों पर मिले सुझावों की जांच परख कर रही है। लोकसभा में शुक्रवार को आम बजट पर हुई सामान्य चर्चा का उत्तर देते हुये वित्त मंत्री ने कहा आम बजट के कर प्रस्तावों पर संसद सदस्यों से मिली प्रतिक्रिया सहित विभिन्न क्षेत्रों से कई सुझाव और ज्ञापन मिले हैं, इन सभी की जांच पड़ताल की जा रही है। वित्त मंत्री के 22 मार्च को लोकसभा में वित्त विधेयक पर चर्चा का उत्तर देने की संभावना है। बजट में उन्होंने सेवाकर का दायरा बढ़ाते हुये वातानुकूलित व्यवस्था वाले 25 बिस्तरों से अधिक क्षमता के निजी अस्पतालों और चिकित्सा जांच शालाओं पर पांच प्रतिशत की दर से सेवाकर का प्रस्ताव किया है। मुखर्जी ने विशेष आर्थिक क्षेत्र :सेज: पर न्यूनतम वैकल्पिक कर :मैट: लगाने का भी प्रस्ताव किया है। सेज डेवलपर्स और सेज स्थित इकाईयों पर अब 18.5 प्रतिशत की दर से मैट लगाया जायेगा। उद्योगों ने उनके इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। यहां तक कि वाणिज्य मंत्रालय भी इस कदम से असहमति जता चुका है। वित्त मंत्रालय के अधिकारी यह स्वीकार कर चुके हैं कि उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र पर लगाये गये सेवाकर को वापस लेने के बारे में कई ज्ञापन प्राप्त हुये हैं। वर्ष 2011-12 के बजट में वित्त मंत्री के प्रत्यक्ष कर प्रस्तावों से जहां सरकार को 11,500 करोड रुपये का राजस्व नुकसान होगा वहीं सेवाकर सहित अप्रत्यक्ष करों में किये गये फेरबदल से 11,300 करोड़ रुपये की कर प्राप्ति होगी। कुल मिलाकर उनके बजट प्रस्ताव से 200 करोड रुपये की राजस्व कमाई का नुकसान होगा।