खास बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सूरजपुर, शाहबेरी व गुलिस्तानपुर की जमीन लेने में कानून की अनदेखी हुई। कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पर 10 लाख का जुर्माना लगाया।
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा में जमीन का आवंटन रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सूरजपुर, शाहबेरी और गुलिस्तानपुर की जमीन लेने में कानून की अनदेखी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। पिछले ही महीने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमीन पर कब्जे को गैर-कानूनी करार दिया था। इस फैसले के खिलाफ बिल्डरों ने अर्जी दी थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मायावती सरकार और बिल्डरों को किसानों की जमीन लेने के मामले में कड़ी फटकार लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट के ग्रेटर नोएडा आवंटन रद्द करने के फैसले के बाद जहां निर्माण शुरू हो चुका है, उसे गिराना पड़ेगा। जिन बिल्डरों के प्रोजेक्ट इस आदेश से रोकने पड़ेंगे, वे हैं- आम्रपाली, सुपरटेक अजनारा, महागुन और पंचशील बिल्डर्स। आम्रपाली का कहना है कि जिन ग्राहकों ने इन इलाकों में फ्लैट बुक किए हैं, उन्हें वो किसी और प्रोजेक्ट में फ्लैट दिलवाएंगे। दरअसर शाहबेरी गांव में 156 हेक्टेयर, सूरजपुर में 70 हेक्टेयर और गुलिस्तांपुर गांव में 170 हेक्टेयर जमीन वापस किसानों को देने का आदेश दिया गया है, यानी कुल 396 हेक्टेयर जमीन वापस दी जानी है। हालांकि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का कहना है कि वह किसानों से दोबारा बातचीत करने की कोशिश करेगा।न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और एके गांगुली की पीठ ने कहा कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने नियमों का पूरी तरह उल्लंघन कर बिल्डरों को जमीन दी है, जबकि भूमि का अधिग्रहण करने की वजह कुछ और बताई गई थी। पीठ ने यह भी कहा कि सरकार के भूमि को औद्योगिक से रिहायशी उपयोग में बदलने को मंजूरी देने से पहले ही प्राधिकरण ने उसे बिल्डरों को दे दिया था। पीठ ने कहा कि उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ के उस निर्णय में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है, जिसमें कहा गया है कि प्राधिकरण ने भूमि का अधिग्रहण करने के लिए जिस आपात प्रावधान का उपयोग किया था, वह पूरी तरह आंखों में धूल झोंकने के लिए सत्ता द्वारा की गई कार्रवाई थी। न्यायालय ने कहा कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने की वजह का विस्तृत विवरण वह बाद में देगी। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण और सुपरटेक और आम्रपाली जैसे बिल्डरों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में ग्रेटर नोएडा में भूमि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचना को निरस्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी गई थी।मंगलवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मायावती सरकार और बिल्डरों को किसानों की जमीन लेने के मामले में कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि विकास के नाम पर आम किसान की जमीन कौड़ियों के मोल ली जा रही है। लोगों को घरों से निकाला जा रहा है और आवाज उठाने वालों को गिरफ्तार किया जाता है। विरोध करने पर महिलाओं से बलात्कार किया जाता है। भूमंडलीकरण के नाम पर आम आदमी को दरकिनार किया जा रहा है। इससे जुर्म बढ़ेगा। आपको लगता है कि अदालत को कुछ समझ नहीं आता। कई राज्य सरकारें बेवकूफ बनाने का ऐसा अभियान चला रही हैं।