खास बातें
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जुटे कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने केंद्र सरकार से पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को दिए जाने की मांग की।
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जुटे कई राज्यों के वित्त मंत्रियों ने केंद्र सरकार से पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को दिए जाने की मांग की। मौजूदा व्यवस्था के तहत इसके लिए संसद में संशोधन प्रस्ताव पेश करना होता है। इस अनिवार्यता को राज्य सरकारें हटाना चाहती हैं।
केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई वित्त मंत्रियों की प्राधिकार समिति की दो दिवसीय बैठक सोमवार को भोपाल में शुरू हुई। समिति के अध्यक्ष और बिहार के उप मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री सुशील मोदी ने संवाददाताओं को बताया कि पहले चरण में सभी वित्त मंत्रियों के बीच पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को देने पर सहमति बनी।
उन्होंने बताया कि पेशा कर में अंतिम संशोधन वर्ष 1988 में हुआ था, जिसके अनुसार अधिकतम पेशा कर 2500 रुपये लगाने की व्यवस्था की गई थी। वर्तमान व्यवस्था के मुताबित पेशा कर की इस ऊपरी सीमा को बढ़ाने के लिए संसद में प्रस्ताव पारित कराना होगा। सभी वित्त मंत्रियों की राय है कि संसद से एक संशोधन पारित कर पेशा कर लागू करने का अधिकार राज्यों को दे दिया जाए।
मोदी ने बताया कि कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां केंद्र सरकार द्वारा लागू सेवा कर तथा राज्यों द्वारा लागू वैट दोनों वसूले जाते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं पर दो करों की मार पड़ती है। लिहाजा राज्यों की सूची में शामिल क्षेत्रों को केंद्र की अनुसूची से बाहर कर दिया जाए।
वित्त मंत्रियों की यह भी मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि सीधे राज्य सरकारों को दी जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान जैसी कई योजनाएं हैं, जिनके लिए राशि समितियों को दी जाती हैं। परिणामस्वरूप इस पर सरकार का नियंत्रण नहीं रहता। इन पर सरकारों का नियंत्रण रहे, इसके लिए यह राशि सरकारों को दी जानी चाहिए।
राज्य सरकारों के वित्त मंत्रियों ने सेवा कर की परिभाषा में संशोधन की मांग भी की है। उनका सुझाव है कि सेवा को सिर्फ आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जाना चाहिए, न कि हर गतिविधि को सेवाकर में रखा जाए। वित्त मंत्रियों ने केंद्रीय वणिज्य कर की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान भी जल्द किए जाने की मांग की।
दो दिन तक चलने वाली इस बैठक में हरियाणा, तामिलनाडु, दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़ और बिहार के वित्त मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने के कारण वहां के वित्त मंत्री बैठक में हिस्सा लेने नहीं पहुंचे।