खास बातें
- सेज डेवलपर्स पर मैट लगाने का प्रस्ताव एक साल पहले ही कर दिया गया है। पहले इसे एक अप्रैल, 2012 से लागू किया जाना था।
मुंबई: विशेष आर्थिक क्षेत्रों :सेज: को न्यूनतम वैकल्पिक कर :मैट: के दायरे में लाए जाने के प्रस्ताव पर रीयल्टी क्षेत्र ने निराशा जताई है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोमवार को पेश आम बजट में सेज डेवलपर्स पर मैट लगाने का प्रस्ताव किया है। जोंस लैंग लासाले इंडिया के चेयरमैन और देश के प्रमुख अनुज पुरी ने कहा, इससे सेज के तहत डेवलपर्स को मिल रहा लाभ खत्म हो जाएगा। सेज डेवलपर्स पर मैट लगाने का प्रस्ताव एक साल पहले ही कर दिया गया है। पहले इसे एक अप्रैल, 2012 से लागू किया जाना था। इस कर को एक साल पहले लगाने के प्रस्ताव से डेवलपर्स खुश नहीं हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक प्रणब दत्ता ने कहा, इससे भविष्य में सेज के डेवलपर्स में कर लाभ को लेकर आशंकाएं पैदा होंगी। एक अन्य प्रमुख डेवलपर निरंजन हीरानंदानी ने कहा, पहले ही कई डेवलपर्स सेज को सरेंडर कर रहे हैं। मैट के बाद इसमें और इजाफा होगा। हीरानंदनी ने कहा कि ऐसी परियोजनाएं जहां सरकार ने दीर्घावधि के लिए प्रतिबद्धता जताई है और जिनमें डेवलपर्स और उद्योग ने निवेश कर दिया है उन पर यह कर नहीं लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैट लगाना उचित नहीं है और यह सरकार की सेज को प्रोत्साहन देने की नीति के उलट है।