खास बातें
- सहारा समूह ने सेबी के आदेशों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सेबी का यह कदम पुराने तथ्यों पर आधारित है। समूह ने यह भी कहा कि व्यक्तियों की संपत्ति कुर्क करने का आदेश बाजार नियामक के लिए उपयुक्त नहीं है।
मुंबई: शेयर बाजार नियामक सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों के खिलाफ निवेशकों का पैसा लौटाने के चर्चित मामले में सख्त कदम उठाते हुए इन कंपनियों और समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय समेत कुछ शीर्ष अधिकारियों के खातों पर रोक लगाने तथा अचल संपत्ति की कुर्की के आदेश दिए।
उच्चतम न्यायालय ने इन कंपनियों को निवेशकों का 24,000 करोड़ रुपये से अधिक का धन वापस करने का आदेश दे रखा है।
इसका अनुपालन सेबी को कराने का निर्देश दिया गया है। न्यायालय ने पिछले सप्ताह निर्देश दिया था कि यदि सहारा समूह की कंपनियां निवेशकों का पैसा नहीं लौटाने के लिए सेबी के पास पैसा जमा नहीं करती हैं तो बाजार नियामक उसके खातों पर रोक लगाने तथा संपत्ति कुर्क करने को स्वतंत्र है।
सेबी ने सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कारपोरेशन लि. और सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कॉरपोरेशन लि. के खिलाफ दो अलग-अलग आदेश जारी करते हुए कहा कि इन कंपनियों ने बांडधारकों से क्रमश: 6,380 करोड़ रुपये तथा 19,400 करोड़ रुपये जुटाए थे। धन जुटाने में ‘अनेक अनियमितताएं’ बरती गईं।
वहीं, सहारा समूह ने सेबी के इन दो आदेशों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि सेबी का यह कदम पुराने तथ्यों पर आधारित है। समूह ने यह भी कहा कि व्यक्तियों की संपत्ति कुर्क करने का आदेश बाजार नियामक के लिए उपयुक्त नहीं है। समूह के प्रवक्ता ने कहा कि सहारा के अनुसार कुल देनदारी 5,120 करोड़ रूपये से अधिक नहीं है, जिसे पहले ही सेबी के पास जमा करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने शीर्ष न्यायालय के समक्ष एक अंतरिम अर्जी देकर बकाया किस्तों के लिए मुचलका पेश करने की अनुमति मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में इन कंपनियों को निवेशकों का पैसा 15 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया था और सेबी से इसकी व्यवस्था देखने को कहा गया था। सहारा समूह की अर्जी पर दिसंबर, 2012 में ये पैसा तीन किस्तों में लौटाने की छूट दी गई।
न्यायालय ने उस समय आदेश दिया था कि सहारा समूह 5,120 करोड़ रुपये तत्काल जमा करे और 10,000 करोड़ रुपये जनवरी के पहले सप्ताह में और बाकी धन फरवरी 2013 के पहले सप्ताह में दे। सेबी ने अपने आदेश में कहा कि इनमें से किसी कंपनी ने बाकी की किस्तें नहीं जमा कराई हैं, इसलिए उसे न्यायालय के आदेशानुसार यह कार्रवाई करनी पड़ी है। 5,120 करोड़ रुपये के प्रथम भुगतान के बारे में सहारा का कहना है कि उसमें से निवेशकों को केवल 2620 करोड़ रुपये लौटाना बाकी रह गया है। समूह का दावा है कि उसने बांडधारकों को 19,400 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया है।
गोल्डन फोरेस्ट जैसी कुछ और कंपनियों के नाम का हवाला देते हुए समूह की ओर से कहा गया है कि इन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद निवेशकों का कोई धन नहीं लौटाया है, जबकि सहारा समूह लगातार धन वापस करने की प्रक्रिया में लगा हुआ है।
(इनपुट भाषा से भी)