यह ख़बर 04 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

प्रमोटरों को मिली सुविधा, शेयर बेचने में आसानी

खास बातें

  • विभिन्न कंपनियों के प्रमोटरों को अपने शेयर बेचकर हिस्सेदारी कम करने के लिए अब फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर लाने की जरूरत नहीं रहेगी।
मुंबई:

कंपनियों के प्रमोटरों को अपने शेयर बेचकर हिस्सेदारी कम करने के लिए अब फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर लाने की जरूरत नहीं रहेगी। अब वह अपना हिस्सा स्टॉक एक्सचेंज की मदद से ऑक्शन करके बेच सकते हैं। यह फैसला बाजार के रेग्युलेटर सेबी बोर्ड ने लिया है। इस फैसले के बाद कंपनियां अपनी हिस्सेदारी 75 फीसदी से कम करके बाजार से आसानी से पैसा उठा पाएंगी। माना जा रहा है कि सेबी के इस कदम से सरकारी कंपनियों के साथ ही वित्त मंत्रालय को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

सेबी ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब प्रमुख केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने के बारे में किसी फार्मूले पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक होने वाली है। इन केंद्रीय उपक्रमों में ओएनजीसी, सेल, भेल, एनटीपीसी और इंडियन ऑयल, ऑयल इंडिया सहित करीब 100 प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचकर 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन शेयर बाजार की खराब स्थिति और प्राथमिक पूंजी बाजार में निवेशकों का टोटा होने के चलते सरकार इस लक्ष्य के कहीं आसपास भी नहीं पहुंच पाई।

सेबी निदेशक मंडल की बैठक में जो निर्णय लिया गया, उससे सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों में शेयर बिक्री के लिए एक उपयुक्त ढांचा उपलब्ध हो जाएगा। इसके तहत कंपनी के प्रमोटरों को अपनी 10 प्रतिशत तक हिस्सेदारी नीलामी के जरिये बेचने का रास्ता मिलेगा। इस प्रणाली को संस्थागत आवंटन कार्यक्रम नाम दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि सरकार केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में सबसे बड़ी हिस्सेदार और प्रवर्तक है। सरकारी नियम के अनुसार, सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों में कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सेदारी जनता के पास होनी चाहिए। निजी क्षेत्र की कंपनियों में यह सीमा न्यूनतम 25 प्रतिशत तक है। (इनपुट भाषा से भी)


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