नई दिल्ली: सहारा समूह को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) से कुछ राहत मिली है. सैट ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा सहारा म्यूचुअल फंड को योजनाओं को बंद करने के लिए दिए गए आदेश पर स्थगन दे दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी. सहारा समूह ने एक बयान में कहा कि सेबी ने पिछले सप्ताह जारी आदेश में सहारा म्यूचुअल फंड्स को अपनी सभी योजनाएं बंद करने को कहा था.
सेबी के आदेश में कहा गया था कि एक को छोड़कर सभी योजनाओं को 21 अप्रैल तक बंद किया जाए. हालांकि, कंपनी को सहारा टैक्स गेन फंड योजना 27 जुलाई तक जारी रखने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस दौरान वह नया निवेशक स्वीकार नहीं कर सकती थी. सेबी के आदेश के अनुसार इस योजना को 27 अगस्त तक बंद किया जाना था.
सेबी के आदेश को सहारा म्यूचुअल फंड ने न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी. बयान में कहा गया कि सहारा को राहत देते हुए सैट ने सेबी के सहारा म्यूचुअल फंड को टैक्स गेन फंड को छोड़कर अपनी सभी योजनाओं को बंद करने के आदेश पर स्थगन दे दिया है.
सहारा समूह, सेबी के साथ नियामकीय और कानूनी लड़ाई में उलझा हुआ है. सहारा की दो इकाइयों को निवेशकों का 24,000 करोड़ रुपये लौटाना है. जुलाई, 2015 में सेबी ने सहारा एमएफ का पंजीकरण रद्द करते हुए कहा था कि वह इस कारोबार के लिए उपयुक्त नहीं है. कंपनी को अपने परिचालन को अन्य एमएफ कंपनी को स्थानांतरित करने को कहा गया था. सेबी ने छह माह की अवधि समाप्त होने के बाद सहारा एमएफ के पंजीकरण को रद्द करने का आदेश दिया था.
सेबी के आदेश के बाद सहारा एमएफ ने प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की थी जिसने उसे उच्चतम न्यायालय जाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था. कंपनी की अपील को उच्चतम न्यायालय ने अक्तूबर, 2017 को खारिज कर दिया था.
इसके बाद सेबी ने सहारा एमएफ को जुलाई, 2015 के आदेश की सीमा का कड़ाई से पालन करने को कहा था. पिछले सप्ताह सेबी ने अपने पिछले आदेश को संशोधित करते हुए सहारा एमएफ को सहारा टैक्स गेन फंड को छोड़कर अन्य योजनाओं को 21 अप्रैल, 2018 तक बंद करने का निर्देश दिया था.
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