खास बातें
- नियामकीय नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए सेबी ने यह कदम उठाया है। एसआईआरईसीएल का नाम बदलकर सहारा कमोडिटी सर्विसेज कारपोरेशन कर दिया गया है।
नई दिल्ली: बाजार नियामक सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कारपोरेशन लि. (एसआईआरईसीएल) और सहारा हाउसिंग इंवेस्टमेंट कारपोरेशन (एसएचआईसीएल) को पूर्णत: शेयरों में परिवर्तनीय विकल्प वाले डिबेंचरों (ओएफसीडी) के तहत जुटाए गए धन को निवेशकों को 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया। नियामकीय नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए सेबी ने यह कदम उठाया है। एसआईआरईसीएल का नाम बदलकर सहारा कमोडिटी सर्विसेज कारपोरेशन कर दिया गया है। इन कंपनियों के खिलाफ यह कार्रवाई सेबी के नियमों की अवहेलना कर ओएफसीडी के जरिये धन जुटाने के मामले में की गई है। सेबी के पूर्ण कालिक सदस्य द्वारा आज जारी यह आदेश इस मामले में उच्चतम न्यायालय के अंतिम आदेश के बाद प्रभावी होगा। सेबी ने इन कंपनियों के प्रवर्तक सुब्रत राय सहारा और तीन निदेशकों पर धन वापसी की प्रक्रिया संतोषजनक रूप से पूरी होने तक किसी सूचीबद्ध कंपनी से संबद्ध रखने और जनता से धन जुटाने पर पाबंदी लगाने की भी घोषणा की है। सेबी की विज्ञप्ति में कहा गया है कि उसके इस आदेश की एक प्रति उच्चतम न्यायालय के गत 12 मई के आदेश के मद्देनजर न्यायालय के रजिस्टार कार्यालय में तत्काल जमा कर दी जाएगी। विज्ञप्ति के अनुसार, एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल तथा इसके प्रवर्तक सुब्रत राय सहारा व इन कंपनियों के निदेशकों वंदना भार्गव, रविशंकर दूबे तथा अशोक राय चौधरी इस आदेश के तहत संयुक्त रूप से और अलग अलग भी निवेशकों से जुटायी गई राशि लौटाने को जिम्मेदार होंगे। सेबी का यह आदेश सहारा समूह की कंपनियों द्वारा डिबेंचर निर्गम के लिए 13 मार्च 2008 और 6 अक्तूबर 2009 को जारी विवरण पुस्तिका के मसौदे (आरएफपी) के तहत जुटायी गये धन के संबंध में लागू होगा। सेबी के आदेश में कंपनी के प्र्वतकों और निदेशकों का धन डिमांड ड्राफ्ट या पे आर्डर के जरिये लौटाने के लिए कहा गया है। दोनों कंपनियों को यह भी निर्देश है कि वे धन वापसी का ब्यौरा संबंधित व्यक्तियों के नाम और पते समेत हिंदी और अग्रेजी के एक एक राष्ट्रीय दैनिक में सार्वजनिक नोटिस के रूप में प्रकाशित करवाएंगी। उन्हें आदेश के 15 दिन के भीतर ऐसा करना होगा। उल्लेखनीय है कि सेबी ने पिछले वर्ष 24 नवंबर को निवेशकों और शेयर बाजार के हित के मद्देनजर एक अंतरिम आदेश में इन दोनों कंपनियों पर ओएफसीडी के जरिये धन जुटाने पर रोक लगा दी थी। बाद में यह मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच गया। उच्चतम न्यायालय ने 12 मई 2011 को सेबी को निर्देश दिया कि वह इस मामले में सहारा समूह की कंपनियों के अर्जी पर सुनवाई कर अपना फैसला शीघ्र करे ताकि गर्मियों के अवकाश के बाद इस मामले पर न्यायालय उपयुक्त आदेश पारित कर सके। न्यायालय ने यह भी कहा था कि उसका निर्णय आने तक सेबी का फैसला प्रभावी नहीं होगा।