यह ख़बर 01 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'महंगाई पर काबू को खुदरा क्षेत्र में एफडीआई जरूरी नहीं'

खास बातें

  • योजना आयोग ने कहा कि सरकार का यह कतई नहीं मानना कि बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए बहु ब्रांड खुदरा कारोबार में एफडीआई जरूरी है।
नई दिल्ली:

योजना आयोग ने कहा कि सरकार का यह कतई नहीं मानना है कि बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए बहु ब्रांड खुदरा कारोबार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) जरूरी है। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने कहा, 'मैं नहीं मानता कि सरकार की यह राय है कि मौजूदा मुद्रास्फीति को बहु ब्रांड खुदरा कारोबार में एफडीआई के बिना नियंत्रित नहीं किया जा सकता।' उद्योग संगठन फिक्की की सालाना बैठक के अवसर पर उन्होंने कहा, 'हम मुद्रास्फीति को नियंत्रण में ला सकते हैं।' सरकार इस क्षेत्र में एफडीआई की मंजूरी देने पर विचार कर रही है। बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र के उदारीकरण के बारे में उद्योग मंत्रालय के परामर्श पत्र में कहा है कि इस क्षेत्र में विदेशी निवेश से मुद्रास्फीति पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। भारत में खुदरा कारोबार में आमतौर पर घरेलू परचून या किराना दुकानों की बहुतायत है। मुद्रास्फीति विशेषकर खाद्य मुद्रास्फीति सरकार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। खाद्य मुद्रास्फीति दिंसबर के अंत में 18.32 प्रतिशत थी जो फरवरी मध्य में 11.49 प्रतिशत हो गई।


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