रुपये का 'अंतरराष्ट्रीयकरण' करने के लिए RBI को उठाने चाहिए ठोस कदम : रिपोर्ट

रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय भुगतानों में दिक्कतों के बीच SBI Research की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये में निर्यात सेटलमेंट पर जोर देने का यह अच्छा मौका है और इसकी शुरुआत कुछ छोटे निर्यात भागीदारों के साथ की जानी चाहिए.

रुपये का 'अंतरराष्ट्रीयकरण' करने के लिए RBI को उठाने चाहिए ठोस कदम : रिपोर्ट

रुपये में जारी गिरावट के बीच अंतरराष्ट्रीयकरण करने पर जोर. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

केंद्रीय रिजर्व बैंक को भारतीय करेंसी रुपया को इंटरनेशनलाइज़ या अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए सक्रियता से कदम उठाने चाहिए. रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय भुगतानों में दिक्कतों के बीच SBI Research की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है. गुरुवार को जारी हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये में निर्यात सेटलमेंट पर जोर देने का यह अच्छा मौका है और इसकी शुरुआत कुछ छोटे निर्यात भागीदारों के साथ की जानी चाहिए. बता दें कि किसी करेंसी को तब अंतरराष्ट्रीय दर्जे का माना जाता है, जब दुनिया भर में इसके जरिए भुगतान को स्वीकार्यता प्राप्त हो.

रिपोर्ट में रुपये की कीमत स्थिर करने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना भी की गई और कहा गया है कि इससे बाजार का विस्तार होगा. अभी आरबीआई ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट को थामने के लिए बुधवार को विदेशी मुद्रा प्रवाह से संबंधित मानकों को उदार बनाने के साथ ईसीबी (विदेशों से वाणिज्यिक उधारी) मार्ग के तहत बाह्य उधारी सीमा दोगुनी कर दी है.

क्रेडिट ग्रोथ पर एसबीआई रिसर्च ने कहा कि "बैंक क्रेडिट में सतत वृद्धि राहत की बात है और यह दिखाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था गिरावट के बीच अब भी काफी अच्छे से रास्ता बना रही है. इस क्रेडिट ग्रोथ के कई पहलू हैं." पेपर में यह भी कहा गया है कि भू-राजनैतिक तनावों से संबंधित कई सेक्टरों में कार्यगत पूंजी का इस्तेमाल प्रभावित हुआ है.

अगर रुपये की कीमत की बात करें तो आज इसकी कीमत शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे टूटकर 79.25 पर आ गई.

रुपये में विदेशी निवेश का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद

गुरुवार को आरबीआई के कदमों को लेकर आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने गुरुवार को कहा कि आरबीआई के उठाए गए कदमों से विदेशी संस्थागत निवेशकों का प्रवाह बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति मजबूत होगी. सेठ ने कहा कि बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) की सीमा दोगुनी करने समेत आरबीआई के अन्य कदम सीमित अवधि के लिए ही लागू रहेंगे और इनसे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलेगी.

इसके साथ ही सेठ ने उम्मीद जताई कि वैश्विक चुनौतियां कुछ समय के बाद कम हो जाएंगी. उनका इशारा रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव की तरफ था। आपूर्ति शृंखला बाधित होने के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत पिछले कुछ महीनों में 4.1 प्रतिशत तक गिर चुकी है.

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

Video : पूर्व CEA अरविंद सुब्रमण्‍यम ने कहा, 'RBI ने मुद्रास्‍फीति को नीचे रखने के उपाय करने में देर कर दी'