खास बातें
- अब रेपो रेट बढ़कर 7.5 फीसदी हो गई है, जबकि रिवर्स रेपो रेट बढ़कर 6.5% हो गई है। हालांकि सीआरआर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
Mumbai: अब आप आवास, वाहन या अन्य ऋणों के लिए हर माह अधिक ईएमआई चुकाने के लिए तैयार रहें। भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की मध्य तिमाही समीक्षा में लघु अवधि की ऋण और उधारी दरों में 0.25 प्रतिशत की और वृद्धि कर दी है। मार्च, 2010 के बाद से केंद्रीय बैंक ने महंगाई से लड़ने के लिए नीतिगत दरों में 10वीं बार बढ़ोतरी की है। रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों को अल्प अवधि के लिए दी जाने वाली अपनी नकदी पर ब्याज दर (रेपो दर) 0.25 प्रतिशत बढाकर 7.5 प्रतिशत कर दी है। इसी के अनुरूप बैंक ने अपने पास बैंकों द्वारा अल्प अवधि के लिए रखी जाने वाली नकदी पर ब्याज दर (रिवर्स रेपो दर) में भी इतनी ही वृद्धि कर इसे 6.5 प्रतिशत कर दिया है। रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो दर को रेपो दर से एक प्रतिशत कम रखने की घोषणा कर रखी है। केंद्रीय बैंक ने अल्पकालिक नकदी समायोजना सुविधा के तहत रेपो और रिसर्व रेपो दरों के साथ साथ हाल में बैंकों को नकदी की तंगी से निपटने के लिए दी गए नई नकदी की स्थायी सीमांत सुविधा (एमएसएफ) की दर भी चौथाई प्रतिशत बढ़ाकर 8.5 प्रतिशत कर दी है। अन्य दरों और अनुपातों में बदलाव नहीं किया गया है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि इन कदमों से महंगाई पर अंकुश लगेगा, मांग पक्ष के दबाव को कम कर मुद्रास्फीतिक संभावनाओं को रोका जा सकेगा। बैंकरों ने कहा है कि रिजर्व बैंक के इस कदम से ब्याज दरों पर दबाव बढ़ेगा और अंत में कर्ज महंगा हो जाएगा। इंडियन ओवरसीज बैंक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एम नरेंद्र ने कहा कि इससे लघु अवधि की जमा दरों पर दबाव बढ़ेगा और अंत में कर्ज महंगा होगा। हालांकि, बैंक तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं करेंगे। महंगाई पर लगाम के उपायों की घोषणा करते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा है कि आर्थिक वृद्धि पर इसका असर लघु अवधि में ही पड़ेगा।