यह ख़बर 26 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

2012 तक सभी भारतीयों को बैंकिंग सेवाएं : RBI

खास बातें

  • अगले साल तक 2,000 से अधिक आबादी वाले सभी गांवों और दूर दराज के क्षेत्रों तक मुख्यधारा की बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई जाएंगी।
अगरतला:

अगले साल तक 2,000 से अधिक आबादी वाले सभी गांवों और दूर दराज के क्षेत्रों तक मुख्यधारा की बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई जाएंगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कार्यकारी निदेशक दीपक कुमार मोहंती ने संवाददाताओं को बताया कि गरीबों को सूदखोरों से बचाने और पूरे देश में सभी वयस्कों को बैंकिंग सेवा उपलब्ध कराने के  लिए पारम्परिक बैंक प्रणाली में धीरे-धीरे बदलाव किए जा रहे हैं। आरबीआई ने सभी बैंकों से कहा है कि जिन इलाकों में बैंक की शाखाएं स्थापित नहीं की जा सकती हैं, वहां सेवानिवृत्त बैंक कर्मियों और स्थानीय लोगों की बहाली बिजनेस कॉरसपोंडेंट के रूप में करें, ताकि सभी वयस्कों को बैंकिंग सुविधाएं दी जा सके। आरबीआई अपनी 75वीं वर्षगांठ के समारोहों के तहत 2009 से देश भर में गांवों, कस्बों और दूर-दराज के क्षेत्रों में वित्तीय शिविरों का आयोजन कर रहा है। इसके माध्यम से वह आम जनता को बैंकिंग सेवाओं, गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (एनबीएफसी) और संस्थाओं की अवैध गतिविधियों के बारे में जागरूक कर रहा है। साथ ही सभी तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। मोहंती अन्य बैंक अधिकारियों के साथ अगरतला से 65 किलोमीटर की दूरी पर गर्जनमुरा में इसी तरह के एक शिविर में हिस्सा लेने आए थे। उनके साथ आरबीआई की गुवाहाटी क्षेत्र की निदेशक सुरेखा मरांडी भी थीं। मोहंती और मरांडी ने कहा कि आरबीआई पूर्वोत्तर क्षेत्रों में वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस क्षेत्र में कुछ और शाखाएं स्थापित करेंगा। ये शाखाएं अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में स्थापित की जाएंगी।


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