जीक्यूजी पार्टनर्स के चेयरमैन राजीव जैन.
नई दिल्ली: अदाणी ग्रुप के शेयरों पर जीक्यूजी पार्टनर्स का दांव पहले ही लगभग 60% लाभ लौटा चुका है. इसके संस्थापक राजीव जैन और निवेश की योजना बना रहे हैं. जैन की निवेश फर्म ने संपत्ति की गुणवत्ता का हवाला देते हुए 2 मार्च को 15,444 करोड़ रुपये ($1.87 बिलियन) के शेयर खरीदे थे.
GQG पार्टनर्स ने 2 मार्च को ब्लॉक ट्रेड के माध्यम से अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड में 3.39%, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड में 4.1%, अदाणी ट्रांसमिशन लिमिटेड में 2.55% और अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड में 3.51% का अधिग्रहण किया. हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के कारण अदाणी ग्रुप के शेयरों में गिरावट के बाद निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने में इससे काफी मदद मिली.
अदाणी समूह ने भी निवेशकों के डर को दूर करने के लिए 3 बिलियन डॉलर का कर्ज समय से पहले चुकाया, जिससे रिकवरी में मदद मिली. और सुप्रीम कोर्ट के पैनल की रिपोर्ट के बाद पिछले हफ्ते एक नया उछाल आया, जिससे समूह का बाजार पूंजीकरण 10 लाख करोड़ रुपये से ऊपर चला गया.
इस रिबाउंड ने चार अदाणी समूह की कंपनियों में GQG पार्टनर्स की होल्डिंग का मूल्य 9,000 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ाकर 24,659 करोड़ रुपये कर दिया है, जो तीन महीने से भी कम समय में 59% से अधिक का लाभ है.
जैन ने एक साक्षात्कार में बीक्यू प्राइम के नीरज शाह को बताया कि निवेश फर्म के पास अरबपति गौतम अडानी के स्वामित्व वाले समूह में निवेशित 2.3-2.4 बिलियन डॉलर की कुल हिस्सेदारी (लागत के आधार पर) है. जैन ने कहा, "हमें बहुत ही आकर्षक मूल्यांकन पर शानदार संपत्ति मिल रही थी."
जैन ने कहा कि हमारे निवेश सुप्रीम कोर्ट के पैनल द्वारा 19 मई को सार्वजनिक की गई रिपोर्ट से पहले किए गए थे. जैन ने ब्लूमबर्ग को पहले बताया था कि उन्हें उम्मीद है कि निवेश दोगुना हो जाएगा.उन्होंने मंगलवार को एक अन्य साक्षात्कार में ब्लूमबर्ग को बताया कि फर्म ने तब से अदाणी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 10% बढ़ा दी है. और इसका मूल्य अब लगभग 3.5 बिलियन डॉलर है.अब वे समूह के फंड रेजिंग योजनाओं में भाग लेने की योजना बना रहे हैं.