खास बातें
- 2−जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर जेल में बंद पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने कोर्ट में अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को गलत बताया है।
नई दिल्ली: 2−जी स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर जेल में बंद पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने सीधे प्रधानमंत्री को इस मामले में घसीटते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ कैबिनेट के फैसले का पालन किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मौजूदगी में फैसले हुए अगर ये बात गलत है तो प्रधानमंत्री इसका खंडन करें। राजा के वकील ने उनका बचाव करते हुए कोर्ट में कहा कि एनडीए सरकार ने जिस नीति की शुरुआत की थी उसी पर बाद के सभी दूरसंचार मंत्रियों ने काम किया। उन्होंने कहा कि अरुण शौरी ने 26 लाइसेंस बांटे तो दयानिधि मारन ने 25 और मैंने 122 लाइसेंस बांटे। किसी ने भी स्पेक्ट्रम की नीलामी नहीं की। राजा ने कहा कि उन्होंने जो नीति अपनाई अगर वो गलत थी तो 1993 के बाद के सभी पूर्व दूरसंचार मंत्रियों को भी उनके साथ जेल भेजा जाना चाहिए। राजा ने गृहमंत्री पी चिदंबरम को भी 2-जी घोटाले में घसीटा है। मामले की जांच कर रही सीबीआई की विशेष अदालत में अपना बचाव करते हुए राजा ने कहा कि यूनीटेक और टेलीनोर और डी बी रियालिटी के बीच हुए सौदे को वित्तमंत्री ने मंज़ूरी दी थी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी उस दौरान मौजूद थे। राजा ने कहा कि स्वान और यूनीटेक के शेयर बेचने का मकसद विदेशी निवेश को बढ़ावा देना था। इससे किसी कॉरपोरेट कानून का उल्लंघन नहीं होता। राजा ने आरोप लगाया कि पी चिदंबरम ने भी प्रधानमंत्री की मौजूदगी में कहा था कि इक्विटी बिक्री नाजायज़ नहीं है।