यह ख़बर 30 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

'संरक्षणवाद से अमेरिका और भारत दोनों को नुकसान'

खास बातें

  • वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यदि अमेरिका भारत में आउटसोर्सिंग के जरिए रोजगार के अवसर रोक लगाता है तो इससे दोनों देश की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान होगा।
शिकागो:

अमेरिका के संरक्षणवादी रवैये से चिंतित वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि यदि अमेरिका भारत में आउटसोर्सिंग के जरिए रोजगार के अवसर रोक लगाता है तो इससे दोनों देश की अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान होगा।

अमेरिका यात्रा पर आए मुखर्जी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यदि अमेरिका भारत में रोजगार की आउटसोर्सिंग पर रोक लगाता है तो काफी हद तक दोनों ही अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होंगी।’’ अपनी दो दिवसीय यात्रा के अंतिम दिन मुखर्जी ने कहा कि सभी देश अपनी जरूरतों के मुताबिक नीति अपनाने को लेकर स्वतंत्र हैं, लेकिन यह नीतियां संरक्षणवाद को बढ़ावा देने वाली नहीं होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) भी वैश्विक स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की मुक्त आवाजाही पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हाल ही में अमेरिका में रोजगार सृजन करने वाली कंपनियों को बड़ी कर राहत प्रदान करने और विदेशों से काम कराने वाली कंपनियों पर अधिक कर लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा, ‘‘संरक्षणवाद से अंतत: उस देश को फायदा नहीं पहुंचता है, जो इस रास्ते पर चलते हैं।’’ उन्होंने कहा ‘‘संरक्षवाद से बचने में ही भलाई है और मुझे विश्वास है कि देश इस रास्ते पर नहीं बढ़ेंगे।’’ मुखर्जी ने कहा कि शुल्कों में कमी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के उदार बनाए जाने से उच्च वृद्धि को बढ़ावा मिला है। उन्होंने सामान एवं वस्तुओं के मुक्त व्यापार और इनके रासते में आने वाले तमाम शुल्क और गैर.शुल्कीय बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया। ऐसे उपायों से सभी को वांछित परिणाम मिले हैं।