खास बातें
- वित्तमंत्री ने अमेरिकी सरकार, शोध संस्थान तथा उद्योग जगत के इस विचार को सिरे से नकार दिया है कि भारत में आर्थिक सुधार की गति धीमी है।
वाशिंगटन: वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अमेरिकी सरकार, शोध संस्थान तथा उद्योग जगत के इस विचार को सिरे से नकार दिया है कि भारत में आर्थिक सुधार की गति धीमी है। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि कई क्षेत्रों में सुधार जारी है जिससे आने वाले दिनों में आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी। हालांकि मुखर्जी ने कहा कि भारत में सुधार के लिए राजनीतिक आम सहमति की जरूरत है जिस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है। उन्होंने सोमवार को यहां कहा कि आर्थिक सुधार एक सतत प्रक्रिया है और संप्रग सरकार इसको लेकर प्रतिबद्ध है। भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय सहयोग पर आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा, आप और सुधार करते हैं, इसके बाद अतिरिक्त सुधार की जरूरत पड़ती है। इस सम्मेलन का आयोजन संयुक्त रूप से उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ तथा वाशिंगटन स्थित शोध संस्थान ने किया था। दूसरे भारत-अमेरिकी आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग चर्चा में भाग लेने के लिए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ कल यहां पहुंचे मुखर्जी ने कहा कि ढांचागत सुधार के मामले में हमने कुछ कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा, हमने हाल में ही ऋण बांड के लिए दिशा-निर्देश को अंतिम रूप दिया है। हमने यह भी निर्णय किया है कि एफडीआई ज्यादा निवेशक अनुकूल हो तथा इससे संबंधित दिशानिर्देश को लेकर व्यापक दस्तावेज बनाया गया है जिसकी हर छह महीने में समीक्षा होगी। इसका मकसद विदेशी निवेशकों के लिये एफडीआई नीति के मामले में और स्पष्टता लाना है।