यह ख़बर 27 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

दूसरे देशों में नहीं फैलेगा यूरोपीय ऋण संकट : प्रणब

खास बातें

  • 'अगर यूरोजोन के कुछ देशों में जारी सरकारी ऋण संकट को नियंत्रित नहीं किया गया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था एक और संकट में पड़ सकती है।'
मुंबई:

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि अगर यूरोजोन के कुछ देशों में जारी सरकारी ऋण संकट को नियंत्रित नहीं किया गया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था एक और संकट में पड़ सकती है। इसका बुरा असर राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के प्रयासों पर हो सकता है। मुखर्जी यहां एसोचैम द्वारा आयोजित बजट बाद की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा-मुझे उम्मीद है कि यूरोजोन के एक छोटे हिस्से में उपजा सरकारी ऋण संकट अन्य देशों में नहीं फैलेगा और उन्हीं चार देशों तक सीमित रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो एक और संकट प्रकट होगा व गिरावट का नया दौर शुरू हो सकता है क्योंकि अर्थव्यवस्था की हालत में सुधार की स्थिति अब भी नाजुक है। उन्होंने अपने इस साल के बजट में राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण के लिए की गई पहल का जिक्र करते हुए कहा, 'कोई भी देश विशेष विदेशी स्रोतों से अनिश्चितकाल के लिए उधारी नहीं ले सकता।' उन्होंने कहा, 'हमें अपने भूतकाल या 90 की शुरआत या 80 के दशक के अंत में सामने आये हालात की और लौटने की जरूरत नहीं है, हमें और अधिक राजकोषीय अनुशासन लाना होगा।' आम बजट :2011-12: में राजकोषीय घाटा 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो मौजूदा वित्त वर्ष में 5.1 प्रतिशत रहा। सरकार को 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी से अप्रत्याशित धन मिला जिस कारण वह मौजूदा वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को 5.6 प्रतिशत के शुरुआती लक्ष्य से घटाकर 5.1 प्रतिशत करने में सफल रही है।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com