खास बातें
- पॉस्को की उड़ीसा में 12 अरब डॉलर के निवेश की परियोजना के समर्थकों और विरोधियों ने दो अलग-अलग बैठकें आयोजित कीं।
भुवनेश्वर: दक्षिण कोरिया की इस्पात कम्पनी पॉस्को की उड़ीसा में 12 अरब डॉलर के निवेश की परियोजना के समर्थकों और विरोधियों ने रविवार को दो अलग-अलग बैठकें आयोजित कीं। परियोजना के विरोधियों ने कम्पनी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार के विरोध में नारे लगाते हुए एक रैली निकाली और प्रस्तावित परियोजना स्थल का प्रवेश द्वार माने जाने वाले बालीटुठा में इकट्ठा हुए। राजनीतिक नेताओं और विस्थापन विरोधी कार्यकर्ताओं ने इस सभा को सम्बोधित किया। राजनीतिक नेताओं में कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के नेता शामिल थे। परियोजना के विरोध में आंदोलन की अगुवाई करने वाली पॉस्को प्रतिरोध संघर्ष समिति (पीपीएसएस) ने यह रैली निकाली। पीपीएसएस के नेता अभय साहू ने कहा कि इस परियोजना से हजारों लोगों का विस्थापन होगा और उनकी पान की खेती उजड़ जाएगी, इसलिए वे इस परियोजना का विरोध जारी रखेंगे। परियोजना विरोधियों की सभा से करीब पांच किलोमीटर दूर परियोजना समर्थकों ने भी एक बैठक आयोजित की। पॉस्को बंदरगाह और संयंत्र कामगार संघ के बैनर तले आयोजित यह बैठक पोलंग गांव में की गई। करीब सौ लोगों की इस सभा में वक्ताओं ने कहा कि परियोजना से क्षेत्र में समृद्धि आएगी और लोगों को रोजगार मिलेगा। पॉस्को ने उड़ीसा के बंदरगाह शहर पारादीप के निकट एक परियोजना शुरू करने के लिए राज्य सरकार के साथ 2005 में एक समझौता किया है। यह देश में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस परियोजना को हाल में सशर्त मंजूरी दे दी है।