खास बातें
- द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के इरादे से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बांग्लादेश से 61 जिंसों के शुल्क मुक्त आयात की घोषणा की है।
Dhaka: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के इरादे से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बांग्लादेश से 61 जिंसों के शुल्क मुक्त आयात की घोषणा की है। अब तक इन वस्तुओं के आयात पर भारत में प्रतिबंध था। इन जिंसों में 46 कपड़ा विशेषकर रेडिमेड परिधान उत्पाद हैं। पहली बार बांग्लादेश यात्रा पर आए सिंह ने कहा कि हम भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार असंतुलन से पूरी तरह अवगत हैं। बांग्लादेश लंबे समय से व्यापार असंतुलन की शिकायत करता रहा है। भारत जहां बांग्लादेश को करीब 3 अरब डॉलर का निर्यात करता है वहीं बांग्लादेश 40 करोड़ डॉलर मूल्य का जूट, अमोनिया तथा परिधान पड़ोसी देश को निर्यात करता है। सिंह ने कहा कि भारत ने व्यापार के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए कई उपाय किए हैं और इससे बांग्लादेश को भारत को निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत, बांग्लादेश द्वारा भारतीय बाजारों में अपने जिंसों के प्रवेश को लेकर उठाए गए गैर-प्रशुल्क बाधाओं से जुड़े मुद्दों का भी समाधान निकाल रहा है। भारतीय कपड़ा उद्योग के सूत्रों के अनुसार बांग्लादेश के शुल्क मुक्त वस्तुओं की सूची में मुख्य तौर पर परिधान शामिल हैं। इसका कारण बांग्लादेश में उत्पादन लागत का भारत की तुलना में कम होना है। बांग्लादेश पिछले एक वर्ष से दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता (साफ्टा) के तहत सभी 61 वस्तुओं को संरक्षित वस्तुओं की श्रेणी में शामिल करने को लेकर भारत पर दबाव दे रहा था। बांग्लादेश व्यापार घाटा को कम करने के लिए इन वस्तुओं की बिक्री को लेकर गंभीर है। बांग्लादेश के उद्योग मंडलों का दावा है कि उन्हें भारत में उच्च गैर-प्रशुल्क बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसमें सभी निर्यातों की अनिवार्य जांच, सीमावर्ती क्षेत्रों में खराब बुनियादी ढांचा, सीमित परिवहन मार्ग तथा भारतीय कारोबारी वीजा प्राप्त करने में बाधा शामिल हैं। इससे उनका कारोबारी लागत बढ़ता है। इससे पहले, बांग्लादेश के अनुरोध का भारतीय कपड़ा मिलों ने विरोध किया था। भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ के महासचिव डी के नायर ने कहा कि भारत सरकार द्वारा उत्पादों खासकर 48 परिधान आइटमों के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने से भारत प्रभावित होगा। बहरहाल, अधिकारियों ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के लिए भारत ने ये कदम उठाए हैं।