यह ख़बर 27 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

पेट्रोलियम शुल्क घटने से केन्द्र को 24हजार करोड़ का नुकसान

खास बातें

  • केन्द्र सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों पर सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क में कटौती से चालू वित्त वर्ष के दौरान करीब 24 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
नई दिल्ली:

केन्द्र सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों पर सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क में कटौती से चालू वित्त वर्ष के दौरान करीब 24 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। वित्त सचिव सुनील मित्रा ने बताया, यह पूरे साल के लिए 49 हजार करोड़ रुपये (शुल्क नुकसान) है। कुछ नुकसान ऐसे हैं जिन्हें राज्यों को उठाना है। मुझे बताया गया है कि हमें करीब 24,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि 10,000 से 11,000 करोड़ रुपये का नुकसान राज्यों को होगा। पेट्रोलियम उत्पादों पर कर कटौती किए जाने से सालाना अनुमानित 49,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। ऐसी भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वर्ष 2011-12 के 4.6 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल होगा। सरकार की राजकोषीय स्थिति पर शुल्क कटौती का क्या असर होगा, यह पूछे जाने पर मित्रा ने कहा, इसका कितना असर होगा, मैं नहीं कह सकता। साल के दो महीने में आप इन चीजों पर निर्णय नहीं कर सकते। सरकारी राजस्व वसूली उम्मीद के अनुरुप नहीं होने पर गौर करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार वित्तीय घाटे को नियंत्रित दायरे में रखने के हर संभव उपाय करेगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पिछले सप्ताह डीजल का दाम तीन रुपये, राशन में बिकने वाले मिट्टी तेल के दाम में दो रुपये लीटर और घरेलू गैस सिलेंडर का दाम 50 रुपये लीटर बढ़ा दिया था, ताकि तेल विपणन कंपनियों के नुकसान को कुछ कम किया जा सके। सरकार ने इसके साथ ही पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद एवं सीमा शुल्क में भी कटौती की है, ताकि पूरा बोझ उपभोक्ता पर नहीं पड़े। उत्पाद एवं सीमा शुल्क कटौती से सरकारी खजाने को 49,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान व्यक्त किया गया।


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