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नई दिल्ली:
प्याज़ के दाम के आगे सरकार भी बेबस हो गई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के एक बयान से तो यही लगता है। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और खाद्य मंत्री केवी थॉमस से मुलाकात के बाद शीला ने कहा कि महाराष्ट्र में प्याज की फसल खराब होने और प्याज की जमाखोरी से उसके दाम काफी बढ़ गए हैं। हैरानी की बात है कि शीला ने जमाखोरों और कालाबाज़ारियों पर कार्रवाई की बात न कहकर उनसे गुजारिश की कि वे ऐसा न करें।
वैसे, दिल्ली में प्याज के दामों पर लगाम लगाने के लिए खुद शीला सरकार प्याज बेचना चाहती है। शीला ने आज कहा कि आचार संहिता लगी होने की वजह से इसके लिए चुनाव आयोग से इजाजत मांगी जाएगी। शीला ने कहा कि दिल्ली के अधिकारियों की एक टीम कम दाम पर प्याज मंगाने के लिए नासिक गई है। इसके अलावा नैफ़ेड भी दिल्ली सरकार को नो प्रोफिट नो लॉस पर प्याज की सप्लाई करेगा। चुनाव आयोग की इजाजत मिली तो सरकार खुद ही प्याज बिक्री के स्टॉल लगाएगी।
वहीं इस मामले पर बीजेपी सीएम पद के उम्मीदवार हर्षवर्धन ने कहा है कि कुछ जगहों पर रेड़ी लगाकर सस्ता प्याज बेचने से प्याज की समस्या का समाधान नहीं होगा।
वैसे, प्याज के मुद्दे पर अगर आप सरकार की तरफ से किसी तरह के कदम की उम्मीद कर रहे हैं तो आपको यह जानकर मायूसी होगी कि प्याज पर केंद्र सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। कृषिमंत्री शरद पवार ने कह दिया कि प्याज पर सरकार का बस नहीं। पवार बुधवार को ही कह चुके हैं कि प्याज की कीमतें दो से तीन हफ्तों से पहले कम होने वाली नहीं।
पवार ने इस बात पर हैरानी जताई कि बड़ी मंडियो में प्याज सस्ता होने के बाद भी इतना महंगा क्यों बिक रहा है? वहीं वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने प्याज की बढ़ती कीमतों के लिए जमाखोरी को जिम्मेदार ठहराया है।
उधर, आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्याज की कालाबाज़ारी के पीछे मंत्रियों का हाथ है।