यह ख़बर 04 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

बढ़ता जा रहा है तेल कंपनियों का नुकसान

खास बातें

  • सरकार नियंत्रित मूल्य पर डीजल, रसोई गैस और केरोसिन की बिक्री करने से तेल कंपनियों का नुकसान बढ़ता ही जा रहा है।
New Delhi:

सरकार नियंत्रित मूल्य पर डीजल, रसोई गैस और केरोसिन की बिक्री करने से तेल कंपनियों का नुकसान बढ़ता ही जा रहा है। तेल कंपनियां पेट्रोल के दाम भी नहीं बढ़ा रही है, जबकि पेट्रोल के दाम सरकारी नियंत्रण से मुक्त किए जा चुके हैं। माना जाता है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए कंपनियां सरकार के इशारे पर ऐसा कर रही हैं। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार यदि स्थिति यही रही तो सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को अप्रैल से शुरू नए वित्त वर्ष में 1,74,126 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व नुकसान होगा। मार्च में समाप्त पिछले वित्त वर्ष में सरकार नियंत्रित मूल्यों पर पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री से तेल कंपनियों को 78,600 करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान हुआ है। इसमें से फिलहाल सरकार की तरफ से कंपनियों को करीब 21,000 करोड़ रुपये की नकद सहायता उपलब्ध कराई गई। अधिकारी ने कहा, वर्ष 2011-12 में इंडियन ऑयल कॉपरेरेशन, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉपरेरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉपरेरेशन को कच्चे तेल के मौजूदा ऊंचे दाम पर 1,74,126 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यदि दाम नीचे नहीं आए और घरेलू बाजार में खुदरा बिक्री मूल्य मौजूदा स्तर पर ही बने रहते हैं तो तेल कंपनियों को इस भारी-भरकम राजस्व नुकसान का बोझ उठाना होगा। इससे पहले तेल कंपनियों को वर्ष 2008-09 में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ था जिसकी भरपाई सरकार को तीन चौथाई राशि के तेल बौंड जारी करके करनी पड़ी थी। दो साल पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 147 डॉलर प्रति बैरल की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गया था।


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