नई दिल्ली:
दिल्ली में जनता ने मतदान से साफ कर दिया कि वह वीआईपी कल्चर को पसंद नहीं करती और पहली बार दिल्ली के इतिहास में एक ऐसी पार्टी सरकार में आई जिसे बने हुए करीब दो साल ही हुई थे। लेकिन, हाल ही में दिल्ली के तमाम सांसदों की एक समिति ने डीजीसीए को एक प्रस्ताव भेजकर यह मांग की है कि उन्हें एयरपोर्ट पर और तमाम एयरलाइंस से कई तरह की वीआईपी सुविधाएं चाहिए।
इस सुविधाओं में प्लेन में मुफ्त नास्ता व पीने का सामान, फर्स्ट क्लास या प्रायररिटी लॉन्ज, एयरपोर्ट पर भीतर जाने के लिए विशेष प्रवेश द्वार तथा एयरलाइंस का एक कर्मचारी खास तौर पर उन्हें प्लेन तक पहुंचाने के लिए और वह उनकी खातिरदारी तब तक करे जब तक हवाई जहाज उड़ न जाए।
इतना ही नहीं, यदि फ्लाइट में देरी है, तब उन्हें फोन के जरिये सूचित किया जाए। मांग यहीं नहीं थमती, इस तमाम सांसदों को अन्य यात्रियों से पहले यह सूचना दी जानी चाहिए, यह भी खासतौर पर इंगित किया गया है।
गौरतलब है कि इनमें से तमाम सुविधाएं इस सांसदों को पहले से ही दी जा रही हैं, जब वह सरकारी एयरलाइंस कंपनी एयर इंडिया से यात्रा करते हैं। अब इन 'वीआईपी' लोगों की मांग है कि निजी कंपनियों के लिए भी इसी प्रकार के आदेश दिए जाएं।
इस पूरे मसले पर नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने साफ कर दिया है कि इस प्रकार की मांग जरूर आई थी, ऐसे कोई आदेश जारी नहीं किए गए।
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने ट्वीट कर कहा है कि लाइन से अलग हटकर सुविधाएं लेने वाले लोगों को अब सामान पर भी लाल बत्ती लगाने की जरूरत महसूस हो रही है।