यह ख़बर 31 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'बचत खाते पर ब्याज नियंत्रण हटने से घट सकता है बैंकों का मुनाफा'

खास बातें

  • अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा कि बैंकों में बचत खाते पर ब्याज नियंत्रण समाप्त करने के रिजर्व बैंक के निर्णय से बैंकों का मुनाफा कम हो सकता है।
नई दिल्ली:

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने आज कहा कि बैंकों में बचत खाते पर ब्याज नियंत्रण समाप्त करने के रिजर्व बैंक के निर्णय से बैंकों का मुनाफा कम हो सकता है। मूडीज ने कहा,  बैंक बचत खाते पर अब अपनी ब्याज दर तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। इस नीति का सीधा असर यह होगा कि बैंक बचत खाते में राशि बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा में उतरेंगे और ज्यादा ब्याज देंगे। इससे बैंकों को सस्ती दर पर जो स्थायी राशि उपलब्ध रहती थी वह अब नहीं मिलेगी। मूडीज ने अपने साप्ताहिक परिदृश्य में कहा, हमें लगता है कि रिजर्व बैंक के इस कदम से पहले से ही दबाव में चल रहे बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन और परिसंपत्ति गुणवत्ता पर और दबाव बढ़ेगा। रिजर्व बैंक ने 25 अक्टूबर को मौद्रिक एवं ऋण नीति की दूसरी तिमाही समीक्षा में एक अहम् निर्णय लेते हुए बैंकों के बचत खाते में एक लाख रुपये से अधिक की जमा पर ब्याज दरों को नियंत्रण मुक्त कर दिया। बैंकों को इससे अधिक बचत राशि पर ब्याज दरें तय करने की स्वतंत्रता होगी। हालांकि, इससे कम राशि पर बैंकों से समान ब्याज दर रखने को कहा गया है। रिजर्व बैंक के इस कदम से बचत खाताधारकों को बेहतर ब्याज मिलने की उम्मीद की जा रही है। मूडीज ने कहा है कि इससे बैंकों के मुनाफे पर असर होगा। बैंकों के बचत खातों में कुल बैंक जमा का करीब एक चौथाई धन रहता है। बचत खाते पर ब्याज दर रिजर्व बैंक तय करता रहा है। इस साल मई में बैंक ने इसे 3.5 प्रतिशत से बढाकर चार प्रतिशत कर दिया था।


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