यह ख़बर 18 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

सेंसेक्स, निफ्टी में आई दो फीसदी की गिरावट

खास बातें

  • भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सख्त मौद्रिक उपायों के जारी रखे जाने के कारण देश के शेयर बाजारों में इस सप्ताह गिरावट दर्ज की गई।
मुम्बई:

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सख्त मौद्रिक उपायों के जारी रखे जाने के कारण देश के शेयर बाजारों में इस सप्ताह गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी इस सप्ताह दो-दो प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स इस सप्ताह 398 अंक (2.2 प्रतिशत) गिरकर 18 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे 17,870 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी इस सप्ताह 120 अंक (2.2 प्रतिशत) गिरकर 5,366 अंक पर बंद हुआ। बीएसई के मिडकैप सूचकांक में 83 अंक (1.2 प्रतिशत) की गिरावट दर्ज की गई और 6,815 अंक पर बंद हुआ। पिछले सप्ताह मिडकैप सूचकांक 6,898 अंक पर बंद हुआ था। बीएसई का स्मॉलकैप सूचकांक इस सप्ताह 114 अंक (1.4 प्रतिशत) गिरकर 8,288 अंक पर बंद हुआ। इस सप्ताह बीएसई में ऊर्जा और एफएमसीजी सूचकांकों को छोड़कर अन्य सभी सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। तेल एवं गैस (-4.8 प्रतिशत), सूचना प्रौद्योगिकी (-4.5 प्रतिशत), प्रौद्योगिकी (3.13 प्रतिशत) सबसे ज्यादा गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं धातु (-2.9 प्रतिशत), ऑटोमोबाइल्स (1.97 प्रतिशत) और रियल्टी (1.9 प्रतिशत) सूचकांकों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस सप्ताह रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (6.7 प्रतिशत), हिन्दुस्तान यूनिलीवार (3 प्रतिशत), रिलायंस कैपिटल (2.5 प्रतिशत), भारती एयरटेल (1.8 प्रतिशत) और एनटीपीसी (1.5 प्रतिशत) सेंसेक्स में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाली कम्पनियां रहीं। वहीं हिंडाल्को (-8.1 प्रतिशत), रिलायंस इंडस्ट्रीज (-8 प्रतिशत), टीसीएस (-6.7 प्रतिशत), विप्रो (-6.5 प्रतिशत) और अंबुजा सीमेंट (-5.8 प्रतिशत) सेंसेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वाली कम्पनियां रहीं। भारतीय रिजर्व बैक द्वारा गुरुवार को जारी की गई अर्द्धतिमाही मौद्रिक समीक्षा में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में 25 आधार अंक की वृद्धि की गई साथ ही बैंक ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए मौद्रिक सख्ती के उपाय जारी रखने के संकेत भी दिए हैं जिसका असर शेयर बाजारों में देखा गया। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी मौद्रिक सख्ती जारी रहने के कारण छोटी अवधि में विकास दर में कमी आने की बात कही है।


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