यह ख़बर 17 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

PSUs को महारत्न का दर्जा देने के नियमों में ढील

खास बातें

  • सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को महारत्न का दर्जा देने के नियमों में गुरुवार को ढील दी। इससे और अधिक कंपनियां महारत्न का दर्जा हासिल कर सकेंगी।
नई दिल्ली:

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को महारत्न का दर्जा देने के नियमों में गुरुवार को ढील दी। इससे और अधिक कंपनियां महारत्न का दर्जा हासिल कर सकेंगी। लोक उपक्रम विभाग द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, महारत्न का दर्जा हासिल करने के लिए पिछले तीन साल के दौरान एक कंपनी का औसत सालाना कारोबार 20,000 करोड़ रुपये होना चाहिए जो पहले 25,000 करोड़ रुपये था। विभाग के पत्र में कहा गया है, केंद्र सरकार की कंपनियों को महारत्न का दर्जा देने के नियमों में ढील दी गई है ताकि ये कंपनियां देश और देश से बाहर प्रतिस्पर्धा की चुनौतियों का प्रभावी तरीके से मुकाबला कर सकें एवं कारोबार का विस्तार कर सकें। नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, पिछले लगातार तीन वर्ष के दौरान सालाना 10,000 करोड़ रुपये की नेटवर्थ और 2,500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाने वाली कंपनियां महारत्न का दर्जा हासिल कर सकेंगी। इससे पहले, महारत्न का दर्जा हासिल करने के लिए पिछले तीन साल में कंपनियों की वाषिर्क नेटवर्थ 15,000 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 5,000 करोड़ रुपये होना आवश्यक था। इस समय, चार महारत्न कंपनियां. ओएनजीसी, इंडियन आयल, सेल और एनटीपीसी हैं। महारत्न दर्जा प्राप्त कंपनी एक परियोजना में 5,000 करोड़ रुपये तक का निवेश का निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकती है, जबकि नवरत्न कंपनियों के लिए यह निवेश सीमा 1,000 करोड़ रुपये है। सरकार ने दिसंबर 2009 में महारत्न दर्जा देने की योजना शुरु की थी। नवरत्न कंपनियों की श्रेणी में कोल इंडिया लिमिटेड, भेल, एनएमडीसी और गेल सहित सार्वजनिक क्षेत्र की 15 कंपनियां शामिल हैं।


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