LIC का IPO जारी होने को लेकर अटकलों के बीच SEBI ने दी ड्राफ्ट को मंज़ूरी : रिपोर्ट

LIC IPO : मंजूरी की खबर तब आ रही है, जब ऐसी अटकलें लग रही थीं कि यूक्रेन संकट के चलते प्रभावित बाजार को देखते हुए सरकार आईपीओ को अगले वित्त वर्ष तक के लिए रोक सकती है.

LIC का IPO जारी होने को लेकर अटकलों के बीच SEBI ने दी ड्राफ्ट को मंज़ूरी : रिपोर्ट

LIC IPO : रिपोर्ट्स के मुताबिक, SEBI ने आईपीओ को मंजूरी दे दी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ग्लोबल बाजार का परिदृश्य बुरी तरह प्रभावित है, ऐसे में सरकारी कंपनी जीवन बीमा निगम के आईपीओ (LIC IPO) को लेकर बीते दिन आशंकाएं उठ रही थीं कि ऐसे माहौल में क्या आईपीओ लाया जाएगा? लगभग 8 बिलियन डॉलर के वैल्यू के इस ऐतिहासिक आईपीओ के लिए महीनों से तैयारी कर रही है. अब खबर आ रही है कि बाजार नियामक सेबी (Securities and Exchange Commission of India-SEBI) ने एलआईसी के आईपीओ के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है. 

रॉयटर्स ने टीवी चैनल ET Now की सूत्रों के हवाले से चली रिपोर्ट के आधार पर बताया है कि सेबी ने एलआईसी आईपीओ को अपनी मंजूरी दे दी है. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईपीओ को सेबी की मंजूरी 12 महीनों तक वैध रहती है.

मंजूरी की खबर तब आ रही है, जब ऐसी अटकलें लग रही थीं कि यूक्रेन संकट के चलते प्रभावित बाजार को देखते हुए सरकार आईपीओ को अगले वित्त वर्ष तक के लिए रोक सकती है. रॉयटर्स ने इसके पहले सूत्रों के हवाले से ही एक रिपोर्ट में कहा था कि एलआईसी को सलाह दे रहे बैंकरों ने सरकार को आईपीओ को टालने की सलाह दी थी. 

एलआईसी को ओर से अभी तक इसपर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. 

बता दें कि सरकार इसी महीने एलआईसी में पांच फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही थी, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 60,000 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान था. इस आईपीओ से चालू वित्त वर्ष के लिए 78,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलने की भी उम्मीद थी.

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विशेषज्ञों ने जताई है आईपीओ टलने की आशंका

लेकिन यूक्रेन संकट के सामने आने के बाद बाजार विशेषज्ञों ने रविवार को कहा कि सरकार आईपीओ को अगले वित्त वर्ष के लिए टाल सकती है, क्योंकि मौजूदा हालात में निर्गम को लेकर फंड प्रबंधकों की दिलचस्पी कम हुई है. आशिका समूह के खुदरा इक्विटी शोध प्रमुख अरिजीत मालाकार ने कहा, ‘रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के चलते मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य वैश्विक इक्विटी बाजारों पर दबाव डाल रहा है. भारतीय बाजारों ने भी इस पर नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है और अब तक अपने उच्चतम स्तर से लगभग 11 प्रतिशत टूट चुका है.'

रिसर्च इक्विटीमास्टर की सह-प्रमुख तनुश्री बनर्जी ने कहा कि बाजार की कमजोर धारणा एलआईसी आईपीओ के लिए निराशाजनक है. ऐसे में इस आईपीओ के स्थगित होने की आशंका है. अपसाइड एआई के सह-संस्थापक अतनु अग्रवाल ने कहा कि व्यापक अनिश्चितता की स्थिति में उभरते बाजारों में हमेशा बिकवाली देखने को मिलती है. इसका मतलब है कि घरेलू बाजारों में नकदी कम हो रही है.

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