LIC IPO : कागजों के पहाड़ में डूबा देश का सबसे बड़ा आईपीओ, डेडलाइन से पहले दिन-रात एक कर रहे सरकारी अधिकारी

LIC IPO : LIC का स्कोप कितना है, देश के पूंजीगत बाजार में इसका क्या असर होगा, वहीं विदेशी निवेशकों के लिए इस सरकारी कंपनी को लेकर कितनी उत्सुकता है, ऐसे कई सवाल हैं, जो फिलहाल खड़े हो रहे हैं और एलआईसी के आईपीओ को लेकर अटकलें भी पैदा कर रहे हैं.

LIC IPO : कागजों के पहाड़ में डूबा देश का सबसे बड़ा आईपीओ, डेडलाइन से पहले दिन-रात एक कर रहे सरकारी अधिकारी

मार्च में आ सकता है LIC का आईपीओ. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

अगर सबकुछ ठीक रहा तो साल 2022 भारत के आईपीओ बाजार (IPO Market) के लिए बहुत बड़ा साबित होगा. अगर आप बिजनेस की खबरों और आर्थिक मोर्चों पर लिए जा रहे फैसलों में दिलचस्पी रखते हैं तो आपको पता होगा कि सरकार देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी जीवन बीमा निगम (Life Insurance Coroporation-LIC) का आईपीओ यानी आरंभिक सार्वजनिक निगम (Initial Public Offering- IPO) लाने की तैयारी कर रही है. लगभग दो सालों से सरकार इस विशाल अभियान में जुटी हुई है, लेकिन अभी तक आईपीओ को लेकर कोई स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आ पाई है. Bloomberg की एक रिपोर्ट में LIC की कुल संपत्ति का आकलन 500 बिलियन डॉलर और लगभग 203 बिलियन डॉलर के आसपास वैल्यूएशन बताया गया है, अगर यह कंपनी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होती है, तो भारत का यह सबसे बड़ा आईपीओ होगा.

भारत में LIC के आईपीओ की तुलना सउदी की दिग्गज ऑयल कंपनी Saudi Aramco की लिस्टिंग से की जा रही है. अरामको ने 29.4 बिलियन डॉलर की लिस्टिंग के साथ दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ डेब्यू किया था. ऐसे में एलआईसी का स्कोप कितना है, देश के पूंजीगत बाजार में इसका क्या असर होगा, वहीं विदेशी निवेशकों के लिए इस सरकारी कंपनी को लेकर कितनी उत्सुकता है, ऐसे कई सवाल हैं, जो फिलहाल खड़े हो रहे हैं और एलआईसी के आईपीओ को लेकर अटकलें भी पैदा कर रहे हैं क्योंकि तयशुदा वक्त के अनुसार आईपीओ लॉन्च होने में बस दो महीनों का वक्त रह गया है लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, कई पहलुओं पर निवेशकों को चिंताएं हैं. 

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क्या-क्या हैं चुनौतियां?

कंपनी के एम्बेडेड वैल्यू को लेकर कन्सलटेशन आ रहे हैं. किसी भी इंश्योरेंस कंपनी का एम्बेडेड वैल्यू उसकी उसकी कुल संपत्ति की वैल्यू और भविष्य में होने वाले प्रॉफिट के मौजूदा वैल्यू को मिलाकर जो सम निकलता है, वो होता है. एलआईसी के वैल्यूएशन के लिए ये एक अहम कसौटी है. अभी इसके वैल्यूएशन का खाका ही सामने नहीं आ सका है.

वहीं, विदेशी निवेशकों को इसके नेचर को भी लेकर चिंताएं हैं, क्योंकि वो अकसर लड़खड़ाते बैंकों और सरकारी संपत्तियों के रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाई जाने वाली कंपनी की स्वायत्तता को लेकर असमंजस में हैं. वहीं, दूसरी ओर स्थानीय निवेशकों में ये दुविधा है कि क्या 65 साल पुरानी सरकारी कंपनी नई कंपनियों के सामने टिक पाएगी.

मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि एलआईसी का आईपीओ इस साल मार्च में आ सकता है. अगर LIC जबरदस्त डेब्यू करती है तो यह 5 फीसदी न्यूनतम डाइलूशन के साथ 10 बिलियन डॉलर तक जुटा सकती है. उम्मीद की जा रही है कि इस आईपीओ से वैश्विक बाजार में भारत की इमेज और बेहतर सकेगी.

देश में दूसरी बीमा कंपनियों के उलट एलआईसी एक अलग संसदीय कानून के हिसाब से चलता है. एलआईसी की एम्बेडेड वैल्यू निकालना दुर्गम काम है. वैल्यूएशन के लिए बहुत जटिल पेपरवर्क और आंकड़ों का समंदर पार करना होगा. रिपोर्ट में एक जानकार के हवाले से बताया गया है कि मार्च, 2020 में एलआईसी की प्रॉपर्टी होल्डिंग्स का इंटरनल वैल्युएशन किया गया था, तो वैल्यू 5.8 बिलियन डॉलर पर आई थी. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल Bloomberg को एक इंटरव्यू में बताया था कि कंपनी का जो इंटरनल वैल्युएशन हर साल होना चाहिए था, वो हुआ ही नहीं है और अब किया जा रहा है.

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जानकारी है कि एलआईसी आईपीओ के लिए ड्राफ्ट जनवरी के आखिरी हफ्ते में कर सकता है. इस ड्राफ्ट से कंपनी के एम्बेडेड वैल्यू, बिक्री के लिए शेयरों की हिस्सेदारी वगैरह जैसी जानकारी सामने आ पाएगी.

एक और चिंता विदेशी निवेशकों को भरोसा दिलाने का है कि एलआईसी उनके लिए भी कसौटी पर खरी उतरेगी. सरकारी कंपनी के ठप्पे वाली एलआईसी की स्वायत्तता को लेकर उनमें असमंजस है.

दिन-रात काम कर रहे हैं अधिकारी

उधर डेडलाइन तक पेपरवर्क पूरा कर लेने के लिए सरकारी अधिकारी दिन-रात एक कर रहे हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि विनिवेश विभाग के कर्मचारी, दिन रात जगकर, छुट्टियां कैंसल करके, बर्थडे भुलाकर, बीमारी में भी काम कर रहे हैं. वहीं, एलआईसी की अपने पॉलिसीहोल्डर्स को भी निवेश का मौका देने की घोषणा के बाद देशभर में पॉलिसीधारक इस ओर उत्सुकता से देख रहे हैं. ऐसे में कह सकते हैं कि इस साल एलआईसी बड़ी खबरें बना सकता है.

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