यह ख़बर 15 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

शर्तों के पूरा होने तक लवासा में यथास्थिति रहेगी

खास बातें

  • पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि लवासा मामले में 'शर्तों के पूरा होने तक यथास्थिति कायम रखी जाएगी।
मुंबई:

पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि लवासा मामले में 'शर्तों के पूरा होने तक यथास्थिति कायम रखी जाएगी। मंत्रालय ने अदालत को बताया कि पुणे के पास लवासा आवासीय परियोजना पर उस समय तक कोई कार्रवाई नहीं होगी, जब तक विशेषज्ञों की आकलन समिति की सिफारिशों के आधार पर तय पूर्व शर्तों को लवासा कॉरपोरेशन पूरा नहीं कर लेती है। विशेषज्ञ समिति ने 31 मई की अपनी बैठक के बाद लवासा मामले में 34 शर्तों लगाने का सुझाव दिया था। मंत्रालय की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सालिसिटर जनरल डेरियस खंबाटा ने बताया कि पर्यावरण मंत्रालय इन शर्तों को लागू करना चाहता है। इस बारे में आदेश जल्द पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालय उस समय तक यथास्थिति बनाए रखेगा जब तक पांच पूर्व शर्तों को पूरा नहीं कर लिया जाता। 34 शर्तों में से पांच पूर्व शते हैं, जिन्हें पूरा किया जाना है। मंत्रालय उस समय तक यथास्थिति नहीं हटा सकता। उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा अंतिम आदेश जारी किए जाने के बाद भी वह उस समय तक कोई कार्रवाई नहीं करेगा, जब तक इन पूर्व शर्तों को पूरा नहीं कर लिया जाता। इन पूर्व शर्तों में लवासा द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) कानून के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई, कंपनी के निदेशक मंडल का प्रस्ताव कि इस गलती को दोहराया नहीं जाएगा, यह वचन कि इस पहाड़ी नगर का विकास हिल स्टेशन नियमन के तहत होगा और विकास नहीं और निर्माण क्षेत्र का स्पष्ट विभाजन शामिल हैं। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 12 जुलाई तय की है। लवासा के वकील शेखर नाफडे ने कहा कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को वह तारीख बतानी चाहिए जब तक वह अंतिम आदेश जारी करेगा। यदि उन्हें लगता है कि पर्यावरण मंजूरी जरूरी है, तो उन्हें आदेश पारित करने दीजिए उसके बाद हम उचित कदम उठाएंगे। खंबाटा ने हालांकि यह नहीं बताने से मना कर दिया कि मंत्रालय किस तारीख तक आदेश पारित करेगा। हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी की इकाई लवासा कारपोरेशन ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के 25 नवंबर के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसमें जरूरी पर्यावरण संबंधी मंजूरी हासिल नहीं करने की वजह से निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।


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