यह ख़बर 18 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

जमीन अधिग्रहण : समिति की राय से इत्तेफाक नहीं रखते रमेश

खास बातें

  • ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश मानसून में यह बिल नए सिरे से लाने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन जमीन कब्ज़े में सरकार की भूमिका पर अब भी राजनीतिक आम राय नहीं है।
नई दिल्ली:

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश जमीन अधिग्रहण के मामले में संसदीय समिति की रिपोर्ट के ख़िलाफ खड़े दिख रहे हैं। गुरुवार को ही संसद में पेश स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकार को सिर्फ बुनियादी ढांचे और सामाजिक परियोजनाओं के लिए ही ज़मीन का अधिग्रहण करना चाहिए, जबकि जयराम रमेश का मानना है कि सरकार की भूमिका बड़ी है।

अलीगढ़ के टप्पल से लेकर भट्टा परसौल तक जमीन कब्जे के ख़िलाफ़ किसानों ने जमकर हंगामा किया है।
इन हंगामों के बाद 118 साल से चले आ रहे कानून को बदलने की जो कवायद शुरू हुई वो अब अपने आख़िरी दौर में है।

ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश मानसून में यह बिल नए सिरे से लाने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन जमीन कब्ज़े में सरकार की भूमिका पर अब भी राजनीतिक आम राय नहीं है। जयराम रमेश की अपनी राय स्थायी समिति के ख़िलाफ़ है।


ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि ज़मीन अधिग्रहण में सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए। औद्योगिकरण की प्रक्रिया में तेज़ी ज़रूरी है। मैं मानता हूं कि प्राइवेट कंपनियां भी सार्वजनिक हित के लिए काम कर सकती हैं।

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जबकि कल ही स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सरकार को सिर्फ बुनियादी ढांचे और सामाजिक परियोजनाओं के लिए ही ज़मीन का अधिग्रहण करना चाहिए। अब जयराम रमेश, ममता बनर्जी का समर्थन मिलने का भी दावा कर रहे हैं।