यह ख़बर 01 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

नहीं सुलझ पाया ईरान तेल भुगतान का मुद्दा

खास बातें

  • ईरान से कच्चे तेल के आयात का भुगतान करने के तौर तरीकों को लेकर भारत और ईरान के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई।
नई दिल्ली:

ईरान से कच्चे तेल के आयात का भुगतान करने के तौर तरीकों को लेकर भारत और ईरान के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई। हालांकि, दोनों देशों ने कहा है कि वह हरसंभव विकल्प की तलाश में हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी वक्तव्य में कहा गया है दोनों पक्षों ने पांच महीने पुरानी भुगतान समस्या को हल ढूढने के लिये विभिन्न विकल्पों को लेकर पिछले दो दिनों में विस्तृत और रचनात्मक विचार विमर्श किया और दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि वह मामले को लेकर लगातार आपसी संपर्क बनाये रखेंगे। ईरान के एक प्रतिनिधिमंडल ने यहां भुगतान की समस्या को लेकर विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों से मुलाकात की और द्विपक्षीय व्यापार से संबंधित भुगतानों के निपटान से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। भारत की तरफ से आर्थिक मामलों के सचिव आर गोपालन ने बातचीत का नेतृत्व किया जबकि ईरान की तरफ से वहां के केन्द्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर हामिद बोरहानी ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। रिपोर्ट के अनुसार भारत ईरान से कच्चे तेल के आयात का भुगतान रुपये सहित विभिन्न मुद्राओं में करने की विकल्पों पर विचार कर रहा है। ईरानी राष्ट्रीय तेल कंपनी के एक अधिकारी सैयद मोहसेन कामसारी ने कहा दोनों पक्ष भुगतान निपटान के लिये विभिन्न मुद्राओं पर विचार कर रहे हैं। भारत के पास उसके विदेशी मुद्रा भंडार में कई देशों की मुद्रायें हैं। हमने उन्हें किसी भी मुद्रा को इस्तेमाल करने की छूट दी है, अब यह उनपर निर्भर करता है, हमें कोई समस्या नहीं है। रिजर्व बैंक द्वारा पिछले साल दिसंबर में भुगतान के लिए उपयोग में लाई जा रही एशियन क्लीयरिंग यूनियन के जरिये ईरान से तेल आयात का भुगतान बंद कर दिए जाने के बाद यह समस्या बनी हुई है।


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