भारत, अमेरिका के पूरक हित हैं : किसिंजर

उन्होंने कहा , ‘‘भारत और अमेरिका के पूरक हित हैं. अच्छी बात यह है कि हमें एक दूसरे के मुताबिक दिशाबद्ध होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह पहले से मौजूद है.’’

भारत, अमेरिका के पूरक हित हैं : किसिंजर

प्रतीकात्मक फोटो

वॉशिंगटन:

अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने नई दिल्ली की सामरिक नीति की प्रशंसा करते हुए कहा है कि भारत और अमेरिका के हित पूरक हैं. पिछले हफ्ते यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक ऐंड पार्टनरशिप (यूएसआईएसपीएफ) फोरम के पहले सालाना नेतृत्व सम्मेलन में शामिल होने वॉशिंगटन पहुंचे किसिंजर ने कहा, ‘‘जब मैं भारत के बारे में सोचता हूं, तो उनकी रणनीति की प्रशंसा का भाव मन में आता है.’’    

उन्होंने कहा , ‘‘भारत और अमेरिका के पूरक हित हैं. अच्छी बात यह है कि हमें एक दूसरे के मुताबिक दिशाबद्ध होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह पहले से मौजूद है.’’

यूएसआईएसपीएफ ने किसिंजर के वक्तव्य जारी किए. किसिंजर के आने से इस सालाना सम्मेलन को सफल बताया जा रहा है. यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष जॉन चैम्बर्स ने कहा , ‘‘हम वाकई में एक स्टार्टअप हैं और अन्य स्टार्ट अप की तरह हमने जबरदस्त तरीके से बदल रहे दो देशों को लेकर एक साहसी लक्ष्य रखा है. इसी लिए हमने एक स्टार्ट अप शुरू किया है जिसका नाम है यूएसआईएसपीएफ. यह एक ऐसा संगठन है जो कहता है कि व्यावसायी नेता होने के नाते हम सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं. ’’

सीनेटर रॉब पोर्टमैन ने कहा कि भारत और अमेरिका ने लंबी दूरी तय की है लेकिन अब भी दोनों देशों को लंबा रास्ता तय करना है. अमेरिका में भारतीय राजदूत नवतेज सरना ने कहा , ‘‘हम हमेशा से लोकतंत्र रहे हैं , हममें हमेशा से समानताएं रही हैं लेकिन हमारे बीच वैसा संतुलन नहीं रहा है. हम हमेशा से एक दूसरे के पीछे या एक दूसरे के सामने बात करते रहे , लेकिन आपस में बात नहीं कर रहे थे. ’’    
उन्होंने कहा , ‘‘ मेरा खयाल है कि कई चीजें - कई वास्तविकताएं , बदलती दुनिया , बहुत बदल चुका भारत , और ग्रहणशील अमेरिका - यह सब हमें उस बिंदू पर ले आए हैं जहां अब हम वास्तविकता में रणनीतिक साझेदार हैं , रक्षा और सुरक्षा मायनों में , व्यापार , अर्थव्यवस्था तथा निवेश के क्षेत्र में और निश्चित ही इसकी आधारशिला है दोनों लोकतंत्रों के बीच समानताएं. ’’    

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अमेरिकी सीनेटर मार्क वर्नर ने कहा कि इन संबंधों की महान विरासत है भारतवंशियों की इसमें शानदार भागीदारी. उन्होंने कहा कि यह संबंध इतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ा होता अगर भारतीय - अमेरिकी समुदाय की इतनी भागीदारी नहीं होती.