इंडियाबुल्स को NAA ने पाया मुनाफाखोरी का दोषी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
नई दिल्ली: रियल एस्टेट बिजनेस में काफी बड़ी कंपनी इंडियाबुल्स रियल एस्टेट को 6.46 करोड़ रुपये की मुनाफाखोरी का दोषी पाया गया है. राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण (एनएए) ने इंडियाबुल्स रियल एस्टेट को 6.46 करोड़ रुपये से अधिक के इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ घर खरीदारों को नहीं देने का दोषी पाया है. एनएए ने पाया कि जीएसटी लागू होने के बाद कीमतों में हुई कमी का लाभ घर खरीदारों को नहीं दिया गया.
एक घर खरीदार द्वारा दायर याचिका पर मुनाफाखोरी-रोधी महानिदेशालय (डीजीएपी) ने मामले की जांच की और बिल्डर को मुनाफाखोरी का दोषी पाया. घर खरीदार ने आरोप लगाया था कि इंडियाबुल्स रियल एस्टेट ने विशाखापत्तनम में स्थित सिएरा-विजाग परियोजना में आईटीसी लाभ नहीं दिया.
एनएए ने 24 जून के अपने आदेश में कहा कि उक्त धनराशि 18 प्रतिशत की दर से ब्याज के साथ घर खरीदारों को वापस की जाए. मुनाफाखोरी की रकम तीन महीने के भीतर घर खरीदारों को देनी होगी.
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लॉरियल इंडिया भी मुनाफाखोरी का दोषी
एनएए ने लॉरियल इंडिया को 186.39 करोड़ रुपये से अधिक की मुनाफाखोरी का दोषी पाया है. एनएए ने पाया कि लॉरियल ने जीएसटी दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं दिया. मुनाफाखोरी रोधी महानिदेशालय (डीजीएपी) की जांच में पाया गया कि लॉरियल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 15 नवंबर 2017 से फेस वाश, शैम्पू, बालों के रंग, कंडीशनर और कुछ मेकअप उत्पादों पर कर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने का लाभ ग्राहकों को नहीं दिया.
एनएए ने मुनाफाखोरी की 50 प्रतिशत राशि या 93.19 करोड़ रुपये केंद्रीय उपभोक्ता कल्याण कोष (सीडब्ल्यूएफ) में और शेष राशि राज्यों के सीडब्ल्यूएफ में जमा कराने का आदेश दिया. साथ ही इन उत्पादों की कीमतों को कम करने का निर्देश भी दिया गया है
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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)