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अब बिना लाइसेंस नहीं बिकेगा दूध, मिलावट रोकने को सरकार का बड़ा फैसला

दूध में होने वाली मिलावट को रोकने के लिए अब केंद्र सरकार ने नए और कड़े नियम बनाए हैं. जिसके चलते अब सभी दूध विक्रेताओं को रजिस्ट्रेशन/लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है. मिलावट के लगातार आ रहे मामलों के बीच सरकार ने दूध कारोबार को रेगुलेट और सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया है.

अब बिना लाइसेंस नहीं बिकेगा दूध, मिलावट रोकने को सरकार का बड़ा फैसला
दूध में होने वाली मिलावट को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने उठाए कड़े कदम.

Doodh Me Milawat: दूध उत्पादकों और विक्रेताओं पर सख्ती करते हुए केंद्र सरकार ने अब सभी के लिए रजिस्ट्रेशन/लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है. मिलावट के लगातार आ रहे मामलों के बीच सरकार ने दूध कारोबार को रेगुलेट और सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया है. इसको लेकर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें कहा गया है मुहिम चलाकर नियम का सख्ती से पालन कराया जाए.

सरकारी डेयरी संस्था को मिलेगी छूट 

एफएसएसएआई ने जारी एडवाइजरी में कहा कि सभी दूध उत्पादकों और दूध विक्रेताओं को अपना काम शुरू करने या जारी रखने के लिए पंजीकरण या लाइसेंस अनिवार्य रूप से लेना होगा. हालांकि, जो व्यक्ति अपना पूरा दूध उत्पादक अमूल, मदर और सुधा डेयरी आदि किसी सहकारी डेयरी संस्था को बेचते हैं, उन्हें इस नियम से बाहर रखा गया है.

हर 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट 

प्राधिकरण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वह नियमित रूप से मुहिम चलाकर बिना लाइसेंस कारोबार कर रहे दूध विक्रेताओं पर कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी के पास एफएसएसएआई का वैध पंजीकरण और लाइसेंस अनिवार्य रूप से हो. सरकार ने  सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि उन्हें अपनी  रिपोर्ट महीने में दो बार यानी हर 15 दिन में अनिवार्य रूप से एफएसएसएआई को सौंपनी होगी. 

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एफएसएसएआई में कार्यकारी निदेशक (सीएस) डॉ. सत्येन कुमार पांडा के अनुसार, हाल के समय में कई राज्यों में दूध में मिलावट के मामले सामने आए हैं. इस पर रोक और लगाम लगाने के लिए नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य कराया जा रहा है. इसी के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि स्पेशल ड्राइव चलाएं जिससे सभी दूध विक्रेता और उत्पादक एफएसएसएआई में पंजीकरण करा लें. इसके साथ ही अधिकारियों को विशेष निर्देश दिया गया है कि मिल्क चिलर की नियमित तौर पर जांच करें ताकि गर्मी के वक्त दूध की गुणवत्ता बनी रहे और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ ना हो सके.

बढ़ जाता है कैंसर और हृदय रोग का खतरा 

चिकित्सकों के अनुसार, मिलावटी दूध स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है. इसके सेवन से पाचन संबंधी विकार जैसे पेट दर्द, दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग की बीमारी हो सकती है. लेकिन अगर लंबे वक्त तक ऐसे दूध का सेवन किया जाए है तो ये जानलेवा भी हो सकता है. लिवर, किडनी अंगों को स्थाई रूप से डैमेज करने के साथ ही ये कई बार कैंसर, हृदय रोग, एलर्जी और विकलांगता जैसी घातक बीमारियों का कारण भी बन जाता है. इसमें मौजूद फॉर्मेलिन, यूरिया और डिटर्जेंट शरीर के लिए बहुत हानिकारक होते हैं. यही वजह है कि हर साल मिलावटी दूध या इससे बने उत्पाद का सेवन करने से लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं.

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