भारत उपग्रह संचार के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी आयोजित करने वाला पहला देश होगा: ट्राई प्रमुख

वाघेला ने सैटकॉम पर ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के सम्मेलन में कहा कि ट्राई जल्द ही इस क्षेत्र में कारोबार सुगमता के लिए विभिन्न मंत्रालयों - सूचना और प्रसारण, अंतरिक्ष और दूरसंचार से उपग्रह संचार के लिए आवश्यक मंजूरियों को आसान बनाने के लिए सिफारिश करेगा.

भारत उपग्रह संचार के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी आयोजित करने वाला पहला देश होगा: ट्राई प्रमुख

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली:

भारत उपग्रह संचार के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी करने वाला पहला देश होगा. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई TRAI) के चेयरमैन पीडी वाघेला ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इसे क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की दृष्टि से ‘डिजाइन' किया जाना चाहिए. वाघेला ने सैटकॉम पर ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम के सम्मेलन में कहा कि ट्राई जल्द ही इस क्षेत्र में कारोबार सुगमता के लिए विभिन्न मंत्रालयों - सूचना और प्रसारण, अंतरिक्ष और दूरसंचार से उपग्रह संचार के लिए आवश्यक मंजूरियों को आसान बनाने के लिए सिफारिश करेगा.

उन्होंने कहा कि ट्राई को नीलामी के लिए आवश्यक स्पेक्ट्रम और उपग्रह आधारित संचार के संबंधित पहलुओं के संदर्भ में दूरसंचार विभाग से एक संदर्भ प्राप्त हुआ है. वाघेला ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि भारत अंतरिक्ष आधारित स्पेक्ट्रम की नीलामी करने वाला पहला देश होगा. हम इसपर काम कर रहे हैं.''

उन्होंने कहा कि भारत संभवत: अंतरिक्ष आधारित स्पेक्ट्रम की नीलामी करने वाला पहला देश होगा. वाघेला ने कहा, ‘‘लेकिन इससे इस क्षेत्र को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. यह बहुत महत्वपूर्ण है. हम जो भी प्रणाली ला रहे हैं वह वास्तव में इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने और बढ़ावा देने के लिए है, न कि कोई बोझ बढ़ाने के लिए. मेरा मतलब है, हमारे सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है और हम इस तथ्य से अवगत हैं.''

ट्राई द्वारा अभी तक उपग्रह संचार के लिए निर्धारित मानक प्रक्रिया के अनुसार स्पेक्ट्रम नीलामी पर परामर्श पत्र लाना बाकी है. इस परिपत्र की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर वाघेला ने कहा कि ट्राई एक उपयुक्त मॉडल के लिए दुनियाभर के विशेषज्ञों और नियामकों के साथ चर्चा कर रहा है और इसके बाद परामर्श पत्र जारी किया जाएगा.

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दूरसंचार परिचालकों ने उपग्रह संचार के लिए नीलामी के जरिये स्पेक्ट्रम आवंटित करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि उपग्रह उद्योग की कंपनियों ने इसका विरोध किया है.