भारत वैश्विक वृद्धि के नए इंजन के खिताब का स्पष्ट दावेदार: एचएसबीसी

भारत वैश्विक वृद्धि के नए इंजन के खिताब का स्पष्ट दावेदार: एचएसबीसी

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

मुंबई:

वित्तीय कंपनी एचएसबीसी का कहना है कि लंबी खिंच रही वैश्विक आर्थिक नरमी के बीच भारत वैश्विक वृद्धि को गति देने वाले इंजन के खिताब का 'स्पष्ट दावेदार' है लेकिन इसके लिए देश को अपनी आर्थिक वृद्धि लगातार दस साल तक मजबूत बनाए रखते हुए आगे बढ़ना होगा।

वैश्विक स्तर पर काम करने वाली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि भारत को अगले दशक के मध्य तक विश्व के सकल घरेलू उत्पाद (वैश्विक जीडीपी) में अपनी हिस्सेदारी कम से कम उस स्तर पर ले जानी होगी जहां तक चीन 2005 में पहुंच गया था। चीन की वृद्धि दर 2005 में चरम पर थी।

एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों ने एक नोट में कहा, ' यदि पश्चिमी देशों को अपनी पुरानी ताकत जल्दी नहीं मिल पा रही है तो वृद्धि आएगी कहां से ? इस मामले में भारत स्पष्ट उम्मीदवार है।' चीन, आर्थिक वृद्धि के वाहक के तौर पर धीमा पड़ने लगा है। ऐसे में भारत इकलौता देश है जहां एक अरब से अधिक की आबादी है और जिसने पिछले साल अपने उत्तरी पड़ोसी के मुकाबले थोड़ी ज्यादा तेजी से वृद्धि दर्ज की थी।

रपट से यह साफ है कि देश की अर्थव्यवस्था इतनी विशाल नहीं है कि चीन की मुख्यभूमि में आ रही नरमी की भरपाई की जा सके लेकिन कहा कि इसमें बड़ी संभावना है। इसमें कहा गया है, 'भारत को अभी चीन के चरम स्तर को पाने में वक्त लगेगा। फिर भी भारत को गिनती से बाहर नहीं रख सकते क्योंकि अगले दशक के मध्य तक भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्व में उतना ही योगदान होगा जितना कि चीन का 2005 में योगदान था जबकि उसने वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी का अहसास करना शुरू किया था।'

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है)


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